बदौसा/बांदा। पाकिस्तानी जेल में 12 साल की यातनाओं भरी कैद काटकर लौटे रामबहादुर की अपने माता-पिता की छत्रछाया में बीती पहली रात भी बेचैनी भरी रही। करवटें बदलकर रात गुजारी। फिलहाल उसे पुराना कुछ याद नहीं आ रहा है। घरवालों को उम्मीद है कि जल्द ही रामबहादुर सामान्य हो जाएगा।
रामबहादुर बृहस्पतिवार को पैतृक गांव पचोखर लाया गया। दिनभर अफसर, मीडिया और गांव वालों से घिरे रहे रामबहादुर को रात होते ही मां कुसमा और पिता गिल्ला ने खाने की थाली परोसी। गुमसुम और खोए-खोए से बेटे रामबहादुर को माता-पिता खिलाते और निहारते रहे।
अपने खपरैलदार मकान में उसका बिस्तर लगाया। पर रामबहादुर को नींद नहीं आई। इस दौरान कई बार मां और पिता ने उसे पुरानी यादें ताजा करने की कोशिश कीं, लेकिन कुछ खास हाथ नहीं लगा।
रामबहादुर सिर्फ हामी भरता रहा। उधर, शुक्रवार को गांव के पूर्व प्रधान लवकुश त्रिपाठी और रामबहादुर के पुराने दोस्त राजेंद्र, रामू और नारायण भी रामबहादुर के पास बैठकर बतियाते रहे, लेकिन उससे कुछ कहला नहीं सके।
बहन रानी ने बताया कि रामबहादुर सामान्य रूप से खाना खा रहा है। उसकी हालत में सुधार हो रहा है। उम्मीद जताई कि भले ही कुछ समय लगे वह पूरी तरह अपनी याददाश्त बहाल कर लेगा।