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बांदा। जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र परिसर के भूखंडों कीबिक्री में धोखाधड़ी के आरोपी बर्खास्त सहायक उपायुक्त सर्वेश कुमार दीक्षित की शुक्रवार को जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जमानत मिलने पर अभियुक्त गवाहों को डरा धमकाकर साक्ष्य प्रभावित कर सकता है। उद्योग विभाग के मौजूदा प्रभारी उपायुक्त मोहम्मद जहीरुद्दीन ने शहर कोतवाली में 17 जून 2021 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वर्ष 2017-18 में तत्कालीन सहायक आयुक्त उद्योग सर्वेश कुमार ने उद्योग केंद्र कार्यालय की लगभग 50 हजार वर्ग फीट भूमि को फर्जी तरीके से अपने पक्ष में पत्र तथा शपथपत्र बनाकर और उपायुक्त की फर्जी मोहर लगाकर अवैध रजिस्ट्री कर दी, जबकि उन्हें इसका अधिकार नहीं था।
जांच के बाद शासन ने सर्वेश को बर्खास्त कर दिया। कोतवाली पुलिस ने आरोपी सर्वेश को हाल ही में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी ने अधिवक्ता के जरिए अदालत में जमानत की अर्जी दी है।
शुक्रवार को इस पर सुनवाई हुई। आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। एफआईआर मनगढ़ंत है। विभागीय जांच में उसे निर्दोष पाया गया है। कहा कि हाईकोर्ट में 9 अगस्त 2021 को उसका बर्खास्तगी का आदेश गैरकानूनी पाते हुए समाप्त कर दिया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह परिहार ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने धोखाधड़ी की, जो गंभीर अपराध है। जमानत दी गई तो गवाहों को डरा धमकाकर अभियोजन साक्ष्य को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश गजेंद्र कुमार ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि इसे स्वीकार करने का कोई ठोस और उचित आधार नहीं है।