बांदा। सूरज की किरणें बुंदेलखंड को सिर्फ तपा हीं नहीं रहीं हैं, बल्कि पस्त पड़ चुके पावर कारपोरेशन की लाज भी बचा रही हैं। यहां दिन के अलावा सूरज रात को भी रोशन कर रहा है।
चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा को सूरज की किरणों से 370 मेगावाट का करंट हर माह मिल रहा है। प्रदेश के पावर कारपोरेशन को इसकी कीमत 36 करोड़ रुपये प्रतिमाह अदा करनी पड़ रही है।
पिछले लंबे अरसे से चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में सब स्टेशन और उनकी क्षमता तो बढ़ी है, लेकिन बिजली का उत्पादन मांग के मुताबिक नहीं बढ़ सका है।
तमाम कवायदों और जद्दोजहद के बाद भी प्रदेश का पावर कारपोरेशन बुंदेलखंड को अपने बिजली घरों से भरपूर आपूर्ति नहीं दे पा रहा है। ऐसे में पावर कारपोरेशन को प्राइवेट क्षेत्र के सौर ऊर्जा प्लांटों पर निर्भर होना पड़ा है।
मंडल के चारों जिलों में कई कंपनियों के सौर ऊर्जा प्लांटों से बिजली आपूर्ति की जा रही है। सूरज की किरणों से पैदा हो रहा करंट सबसे ज्यादा महोबा जनपद में खप रहा है।
प्रदेश में कोई भी सरकार रही हो बुंदेलखंड में बिजली संकट का मुद्दा हमेशा छाया रहा है। कई दशकों पूर्व तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बुंदेलखंड को सामान्य कटौती से मुक्त कर दिया था। इसके बाद आई सरकारों ने भी यह आदेश बहाल रखा, लेकिन कटौती मुक्त के दावे कागजी ज्यादा रहे।
आपातकालीन कटौती बताकर पावर कारपोरेशन यहां भी कटौती करता चला आ रहा है। बिजली कटौती का दंश ग्रामीण क्षेत्रों को ज्यादा सहन करना पड़ा। अब कुछ वर्षों से इस स्थिति में सुधार हुआ है। इसके लिए सरकार को प्राइवेट सौर ऊर्जा प्लांटों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।
मंडल में सौर ऊर्जा प्लांटों से हर माह ली जा रही बिजली और उन्हें दी जा रही कीमत
जनपद बिजली कीमत
बांदा 20 मेगावाट 2 करोड़
चित्रकूट 125 मेगावाट 12 करोड़
महोबा 205 मेगावाट 20 करोड़
हमीरपुर 20 मेगावाट 2 करोड़
मंडल योग- 370 मेगावाट 36 करोड़
सूरज का करंट सबसे ज्यादा महोबा को
सूरज की किरणों का करंट महोबा को सबसे ज्यादा रोशन कर रहा है। मंडल में सर्वाधिक 205 मेगावाट बिजली यहां हर माह सौर ऊर्जा प्लांटों से मिल रही है। दूसरे नंबर पर धर्मनगरी चित्रकूट है।
यहां 125 मेगावाट बिजली आपूर्ति सौर ऊर्जा प्लाटों से हो रही है। बांदा और हमीरपुर में सिर्फ 20-20 मेगावाट बिजली आपूर्ति सौर ऊर्जा प्लांटों से ली जा रही है।
बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा प्लांट, बिजली उत्पादन व कंपनियां
बांदा : 20 मेगावाट (अज्योर पावर प्लांट)।
चित्रकूट : 125 मेगावाट (अडाणी सोलर एनर्जी लिमिटेड)।
महोबा : 205 मेगावाट (यूनिवर्सल सोलर, ग्रीन उजाला सोलर, एसीएमई सोलर, केएम एनर्जी सोलर, आर्यावन सोलर, सुखवीर सोलर, स्पाइनल सोलर, अज्यूर सोलर, अग्रवाल सोलर आदि)
हमीरपुर : 20 मेगावाट (लोहिया डेवलपर, अज्योर सोलर)।
उरई : 130 मेगावाट (अज्योर व जैक्शन कंपनी)।
झांसी : 70 मेगावाट (अडाणी व यूपी मेगा आदि)
ललितपुर : 70 मेगावाट (सुखवीर, समाविष्ट और जैक्शन कंपनी)।
महोबा से हुई शुरुआत
बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा प्लांटों से बिजली कई वर्षों से ली जा रही है। शुरुआत वर्ष 2016 में पनवाड़ी (महोबा) और हमीरपुर से हुई थी। बांदा जिले के चहितारा गांव में भी 20 मेगावाट का सौर ऊर्जा प्लांट चल रहा है।
बुंदेली तपिश ने आकर्षित किया कंपनियों को
बुंदेलखंड में सूरज की तपिश प्रदेश के अन्य हिस्सों से काफी ज्यादा है। शायद सूरज के इसी तेवरों ने प्राइवेट क्षेत्र की सौर ऊर्जा कंपनियों को यहां आकर्षित किया। नतीजे में यहां इन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी है।
इससे आपूर्ति की जाने वाली बिजली की दरें पहले की अपेक्षा घटीं हैं। शुरुआत में यह सात रुपये प्रति यूनिट बिजली बेच रही थी। अब यह तीन रुपये प्रति यूनिट में आ गईं हैं।
सौर ऊर्जा प्लांटों से बिजली लिया जाना कारपोरेशन के लिए घाटे का सौदा नहीं है। सौर ऊर्जा प्लांटों से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इनमें न धूल है और न धुआं। इसलिए इन्हें ग्रीन एनर्जी प्लांट भी कहा जाता है।
बुंदेलखंड में यूं भी पर्यावरण की समस्या पहले से है। रात में सौर ऊर्जा प्लांट बंद हो जाते हैं। तब प्लांट को उनकी जरूरत के लिए पावर कारपोरेशन के सब स्टेशन से बिजली दी जाती है।
-रवि वर्मा, अधिशासी अभियंता (ट्रांसमिशन), यूपी पावर कारपोरेशन
यूपी पावर कारपोरेशन के सब स्टेशनों से रेलवे को भी बिजली दी जा रही है। बांदा में डिंगवाही सब स्टेशन से एक माह में 1318 मेगावाट, खोह (चित्रकूट) सब स्टेशन से 1100 मेगावाट, महोबा सब स्टेशन से 1000 मेगावाट और सुमेरपुर (हमीरपुर) सब स्टेशन से रागौल (मौदहा) रेलवे स्टेशन को 650 मेगावाट बिजली दी जाती है।
-अमित निषाद, उप खंड अधिकारी (ट्रांसमिशन), बांदा