बांदा। एसटीएफ के छह जवान और एक मुखबिर की सामूहिक हत्या के चर्चित मामले में मंगलवार को यहां विशेष न्यायाधीश (डकैती) की अदालत में सुनवाई हुई। सभी 15 आरोपी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किए गए। इन्हें चित्रकूट और बांदा जेल से लाया गया था। छह आरोपियों ने अदालत में अर्जी देकर शीघ्र मुकदमा निस्तारण की फरियाद की।
जुलाई 2009 में फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन तिराहे में दस्यु ठोकिया ने आधी रात के बाद मुठभेड़ से लौट रहे एसटीएफ जवानों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं, जिसमें छह एसटीएफ जवान और उनके साथ मौजूद एक मुखबिर की मौत हो गई थी। सात अन्य एसटीएफ जवान घायल हो गए थे। इस घटना के ठीक एक दिन पहले ही मानिकपुर क्षेत्र में एसटीएफ टीम ने ददुआ को उसके कई साथियों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया था। शहीद जवानों में हेड कांस्टेबल राजेश चौहान, कांस्टेबल उमाशंकर यादव, ब्रजेश यादव, गिरजा नागर, लक्ष्मण और ड्राइवर कांस्टेबल ईश्वर शामिल थे। मुखबिर मुन्ना भी शामिल था।
इस मामले में ठोकिया सहित दो दर्जन से ज्यादा बदमाश आरोपी हैं। ठोकिया की मौत हो चुकी है। मौजूदा समय में 15 आरोपी हैं। इनमें 14 चित्रकूट की जेल में और एक बांदा जेल में हैं। यहां विशेष न्यायाधीश (डकैती) की कोर्ट में इसकी सुनवाई चल रही है।
मंगलवार को आरोपी धर्मेंद्र प्रताप सिंह, किशोरीलाल पटेल, धनीराम, राम प्रसाद, रामबाबू और कल्याण सिंह ने अदालत में अर्जी देकर कहा कि दो वर्षों में तीन बार बहस हो चुकी है। कुछ अन्य अभियुक्तों के अधिवक्ताओं की बहस में देरी की वजह से मुकदमों का निस्तारण नहीं हो पाया। तीन न्यायाधीश बदल चुके हैं, फैसला नहीं हुआ। आरोपियों ने कहा कि वह करीब 15 वर्षों से जेल में हैं। फरियाद की कि उनकी अलग सुनवाई कर निस्तारण किया जाए। विशेष न्यायाधीश नुपुर ने सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें और बहस सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 25 मार्च निर्धारित की है।