खप्टिहा कलां। सिद्धपीठ सद्गुरु सदन मागणी दाई मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन जगन्नाथ पीठाधीश्वर राघवदास महाराज (अयोध्या) ने कहा कि भगवान शरणगत को गले लगा लेते हैं। भगवान की प्राप्ति इससे सरल मार्ग और कोई नहीं है।
कहा कि भगवती पार्वती ने जगतजननी जानकी का रूप धारण कर भगवान श्रीराम की परीक्षा लेनी चाही। भगवान शंकर ने ध्यान से जब यह देखा तो उन्हें बड़ा कष्ट हुआ। जिसे वह मां व पिता मानते हैं आज उसी पिता के सामने पार्वती ने जगत जननी का रूप धारण कर लिया। उल्टा पार्वती ने भगवान शंकर से झूठ भी बोला कि उन्होंने कोई परीक्षा नहीं ली है।
प्रभु राम भगवान शिव के आराध्य हैं। इस पर शिव ने सती का त्याग कर दिया। प्रभु शिव ने ऐसा इसलिए किया कि यदि वह सती का मोह करते हैं तो उनका भक्तों से त्याग हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने दक्ष के ग्रह में हुए यज्ञ व जगत जननी का अग्नि में प्रवेश करने का भी प्रसंग सुनाया। कथा सुनने के लिए कई गांवों के श्रोता मौजूद रहे।