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1947 से चले थे, एके-47 पर आ गए

Mon, 22 Dec 2014 11:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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पंडित जेएन डिग्री कालेज के स्वर्ण जयंती समारोह मेें अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के चुनिंदा कवियों ने समां बांध दी। किसी ने राजनीति पर व्यंग्य के तीर चलाए तो किसी ने प्रेम की बयार बहाई। कड़ाके की ठंड के बावजूद पूरी रात यह सम्मेलन चला।
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डा. सुरेश अवस्थी (कानपुर) की कविता ‘आजादी के अर्थ हमें ऐसे भा गए, 1947 से चले थे एके-47 पर आ गए’ खूब सराही गई।

दिलीप दुबे (कानपुर) ने सुनाया- ‘मोदी ने की चाय ग्रहण, तब से हो गया चाय का राजनीतिकरण’। प्रो. दिनेश गुरुदेव (आगरा) ने आधुनिक नायिका पर हास्य कविता ‘हॉफ पैंट-हॉफ शर्ट, ऊपर से हैट-पैंट’ सुनाई।

राना जेबा (ग्वालियर) ने ‘बेख्याली का कड़ा हाथ है रुसवाई में’ और बुद्धि प्रकाश दधीच (केकड़ी, राजस्थान) की ‘धीरे-धीरे खामोश समंदर में लहर उठानी है’ कविताएं पेश कीं।
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संचालन कर रहे प्रवीण शुक्ला की हास्य रचना ‘जिसने मेरा निकाह कराया था परी के साथ, बीबी हुई फरार उसी मौलवी के साथ’ और विष्णु सक्सेना (अलीगढ़) की प्रेम कविता ‘प्यास बुझ जाए तो शबनम खरीद सकता हूं’ पर खूब तालियां बजीं।

कुंवर जावेद की ‘कोई हिंदुत्व या इस्लाम न पूछा जाए, मरने के बाद अंजाम न पूछा जाए’ व डा.अनु सपन (भोपाल) ‘देखें कितने सितार बजते हैं, दिल के तार-तार बजते हैं’ और मदन मोहन समर (बैतूल) ‘जिनका रक्त गिरा धरा पर हिन्दुस्तान बना’ कविताओं ने भी समां बांधी।

महेंद्र अजनबी व डा. शैलेश गौतम (इलाहाबाद), भावना तिवारी (नोएडा) समेत जवाहर लाल जलज, कृष्ण गोपाल (बांदा) आदि ने भी वीर रस पर आधारित कविताएं पढ़ीं।

इसके पूर्व महाविद्यालय प्राचार्य व समारोह संयोजक डा. नंदलाल शुक्ल ने कवियों को सम्मानित किया। अपर जिलाधिकारी डीएस पांडेय, सिटी मजिस्ट्रेट केएस पांडेय, डीआईओएस एनडी वर्मा समेत बड़ी संख्या में अधिकारी व श्रोता मौजूद रहे।
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