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राजनीति के पुरोधाओं पर भारी पड़े नए नवेले रामकेश

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नवनियुक्त राज्यमंत्री रामकेश निषाद के बेटे को बांदा में मिठाई खिलाते समर्थक। - फोटो : BANDA
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बांदा। राजनीति में नए नवेले रामकेश निषाद चित्रकूटधाम मंडल के पुरोधाओं पर भारी साबित हुए। सरकारी वकील से भाजपा जिलाध्यक्ष पद पर ताजपोशी और दो साल तीन माह संगठन की कमान संभालने के बाद रामकेश ने राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तिंदवारी सीट से कई दिग्गजों को दरकिनार कर टिकट हासिल कर लिया।
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चमकते भाग्य का सफर यहीं पूरा नहीं हुआ। पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे रामकेश ने जिले में सबसे ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। अब सफलता का एक और पायदान चढ़ते हुए वह प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री बन गए हैं।
रामकेश निषाद मूल रूप से तिंदवारी क्षेत्र के पैलानी डेरा गांव के हैं। पुश्तैनी पेशा खेती और वकालत रहा। राजनीतिक सफर बहुत पुराना नहीं है। दो बार भाजपा जिला उपाध्यक्ष रहे। उसके बाद प्रदेश भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा में मंत्री पद पर नियुक्त किए गए। इसी बीच उन्हें सरकारी वकील नामित कर दिया गया।
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इस पर उन्होंने पिछड़ा वर्ग मोर्चा पद से इस्तीफा दे दिया। 23 जनवरी 2020 को लवलेश सिंह के स्थान पर उन्हें भाजपा हाईकमान ने जिलाध्यक्ष पद की कमान सौंप दी। अध्यक्ष का कार्यकाल भी निर्विवाद और शालीनता पूर्वक रहा। परिवार में उनकी पत्नी रामजानकी के अलावा दो पुत्र जय प्रकाश व पार्थ और पुत्री प्रभा हैं।
प्रोफाइल
नाम- रामकेश निषाद
राजनीतिक पद- विधायक (तिंदवारी)/राज्यमंत्री उत्तर प्रदेश
आयु- 47 वर्ष
शैक्षिक योग्यता- विधि स्नातक (एलएलबी)
पारिवारिक स्थिति- पत्नी, दो पुत्र व एक पुत्री।
राजनीतिक अनुभव- भाजपा जिला उपाध्यक्ष और पिछड़ा वर्ग मोर्चा प्रदेश मंत्री
चुनावी अनुभव- मात्र एक बार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा, सफल नहीं हुए।
वीपी सिंह और विशंभर के बाद रामकेश को लालबत्ती
बांदा। तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र का गठन 1974 में हुआ। तब से आज तक यहां 14 विधायक हुए हैं। विधायकों की इसी सूची में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह भी हैं। 1981 में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने इसी सीट से उप चुनाव लड़ा था। उनके पूर्व तक यहां से किसी विधायक को मंत्री पद नहीं मिला था। 1991 में बसपा सरकार में यहां विधायक चुने गए विशंभर प्रसाद निषाद मंत्री बने। उसके बाद 2002 में सपा सरकार में भी यहां से विधायक हुए विशंभर प्रसाद निषाद को मंत्री पद हासिल हुआ। उनके बाद पिछले दो दशक से तिंदवारी को लालबत्ती मयस्सर नहीं हुई थी।

रामकेश निषाद- फोटो : BANDA

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