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एंबुलेंस सेवा ठप होने से मरीज और तीमारदार परेशान

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Patient and family members upset due to halt of ambulance service - फोटो : BANDA
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बांदा। मांगों पर अड़े एंबुलेंस चालकों और ईएमटी (इमर्जेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) की हड़ताल से मरीज परेशान हैं। एंबुलेंस न मिलने से तीमारदारों को भी मरीजों को अस्पताल पहुंचाने या हायर सेंटर ले जाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी एंबुलेंस की हड़ताल का फायदा प्राइवेट एंबुलेंस संचालक उठा रहे हैं। मुंहमांगी कीमत वसूल रहे हैं। हड़ताल से मरीजों को घरों से लाने और उन्हें ले जाने की व्यवस्था बेपटरी हो गई है।
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108 व 102 एंबुलेंस संघ बैनर तले चालकों और टेक्नीशियनों की हड़ताल तीसरे दिन बुधवार को भी जारी रही। बारिश के मौसम में सभी एंबुलेंस खुले आसमान तले खड़ीं हैं। एंबुलेंस कर्मियों ने चेतावनी दी है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती संघर्ष जारी रहेगा। उनकी मांगों में नई कंपनी द्वारा मानदेय में कटौती किए जाने, नई भर्ती करने, प्रशिक्षण के नाम पर डीडी बनवाने और कोरोना काल में दिवंगत एंबुलेंस कर्मियों के आश्रितों को 50 लाख रुपये बीमा राशि देने आदि शामिल हैं।
उधर, हड़ताल में एंबुलेंस सेवा ठप कर दिए जाने पर सबसे ज्यादा परेशान प्रसव पीड़ित महिलाएं हैं। उन्हें लाने और वापस ले जाने के लिए तीमारदारों को प्राइवेट एंबुलेंस व अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। 20 से 50 किलोमीटर की दूरी तक प्राइवेट एंबुलेंस संचालक दो हजार रुपये वसूल रहे हैं।
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नरैनी की प्रीति ने बताया कि महिला अस्पताल में उसने बेटी को जन्म दिया। छुट्टी के बाद उसे 102 एंबुलेंस नहीं मिली। मजबूरन प्राइवेट वाहन करना पड़ा। इसी तरह कालूकुआं की अभिलाषा और मवई गांव की आरती ने बताया कि प्रसव के बाद उसे ई-रिक्शा से घर जाना पड़ा।
इमर्जेंसी सेवा बहाल रखने का दावा फेल
हड़ताल के बाद भी इमर्जेंसी सेवा बहाल रखने का दावा भी फेल साबित हो रहा है। जिला अस्पताल, मेडिकल कालेज, नरैनी, बबेरू और जसपुरा में मात्र एक-एक एंबुलेंस सेवा चालू रखने से यह नाकाफी हैं। जिले में 108 व 102 की कुल 47 एंबुलेंस हैं। रोजाना लगभग 25 से 30 मरीज रेफर किए जाते हैं। हड़ताल से यह सारी व्यवस्थाएं धड़ाम हैं। एंबुलेंस सेवा प्रबंधक उमेश द्विवेदी ने बताया कि इमर्जेंसी पर एंबुलेंस सेवा तत्काल शुरू की जाएगी।
वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सका स्वास्थ्य विभाग
एंबुलेंस सेवा बहाल रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सका। एंबुलेंस चालकों के स्थान पर अस्थाई दूसरे चालकों की परिवहन विभाग से मांग की गई थी। लेकिन हड़ताल को तीन दिन बीत गए और अब तक प्राइवेट चालक नहीं मिल सके। सीएमओ डा.विजय कुमार तिवारी का कहना है कि परिवहन विभाग से चालकों की मांग की गई है। चालक मिलते ही एंबुलेंस सेवा तत्काल शुरू कर दी जाएगी।
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