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निर्माण एजेंसी पर रिपोर्ट, अभियंता ने माफी मांगी

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बांदा/मटौंध। दुरेड़ी गांव के पास बांदा-झांसी रेलवे ट्रैक पर बने अंडरपास की दीवार ढहने के मामले में रेलवे ने आठ दिन बाद निर्माण कराने वाली कंपनी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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ग्रामीणों द्वारा शनिवार को रेल रोको आंदोलन के एलान के बाद बीती देर रात रिपोर्ट दर्ज हुई। रेलवे ट्रैक रोकने जा रहे ग्रामीणों को पुलिस ने रोक लिया। रेलवे के वरिष्ठ मंडल अभियंता ने माफी मांगी और खेद जताया। इसी के बाद ग्रामीण शांत हुए और जाम खत्म किया।
10 सितंबर को रेलवे क्रासिंग नंबर 452 (दुरेड़ी) के अंडरपास की रिटेनिंग वाल अचानक धराशायी हो गई थी, जिससे बड़ा हादसा बच गया था। इसी रास्ते से कई स्कूल-कॉलेज और एमपी की सरहद समेत करीब 40 गांव जुड़े हैं।
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दीवार के मलबे से रास्ता बंद हो गया। स्कूली छात्र-छात्राएं और ग्रामीण परेशान हो गए। रेलवे अफसर चुप्पी साधे रहे। ग्रामीणों सहित कई ग्राम प्रधान और स्कूलों के प्रधानाध्यापक आदि शनिवार को सुबह पूर्व घोषणा के अनुसार अंडरपास के नजदीक जमा हो गए, लेकिन यहां पहले से ही भारी संख्या में पुलिस तैनात थी।
ग्रामीणों को ट्रैक जाने से रोक दिया। आक्रोशित ग्रामीण बांदा-महोबा नेशनल हाई-वे पर धरने में बैठ गए। हाई-वे जाम हो गया। एसडीएम सुधीर सिंह (आईएएस), क्षेत्राधिकारी और मटौंध इंस्पेक्टर भी पहुंच गए।
ग्रामीणों की मांग थी कि तत्काल रास्ता खुलवाया जाए, तब तक नजदीक स्थित रेलवे क्रासिंग (451) को आवागमन के लिए खोला जाए। मौके पर मौजूद रेलवे के वरिष्ठ मंडलीय अभियंता एसएन दुबे ने ग्रामीणों से क्षमा मांगी और खेद जताया।
बताया कि बीती रात 11 बजे मटौंध थाने में कार्यदायी संस्था अदिति कांट्रेक्शन, लखनऊ के विरुद्ध सहायक मंडल अभियंता (बांदा) ने रिपोर्ट दर्ज करा दी है। मंडल अभियंता ने भरोसा दिलाया कि ध्वस्त दीवार के दोनों ओर बारिश कम होते ही एप्रोच रोड बनेगा। गेट नंबर 451 खोलने की मांग वह मुख्यालय को भेजेंगे।
यह गेट सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बंद हुए हैं। कहा कि इस गेट को वाहन गुजरने के लिए ज्यादा से ज्यादा समय खोला जाएगा। इसी के बाद ग्रामीण शांत हुए। ग्रामीणों की ओर से भाजपा नेता और अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने पैरवी की।
जान खतरे में डालने समेत कई धाराएं
बांदा। अंडरपास की रिटेनिंग वाल का निर्माण कराने वाली लखनऊ की कंपनी पर रेलवे की ओर से दर्ज रिपोर्ट में धारा 283 (लोगों की जान खतरे में डालना, आदेश का उल्लंघन), धारा 288 (निर्माण में लापरवाही) और धारा 431 आईपीसी (रास्ता अवरुद्ध करना) लगाई गई है।
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