बांदा। बुंदेलखंड के बकस्वाहा जंगल को हीरा खनन से बचाने के लिए रिट दायर करके हाईकोर्ट से रोक लगवाने वाले पर्यावरण प्रेमी और नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे को पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र में एक और सफलता हाथ लगी है। उनकी जनहित याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों में पटाखों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। जहां वायु गुणवत्ता मध्यम है वहां ग्रीन पटाखों की मात्र दो घंटे अनुमति होगी।
बुंदेलखंड के बकस्वाहा (छतरपुर, एमपी) जंगल को एमपी सरकार द्वारा हीरा खदान के लिए पट्टे पर दे दिया है। यहां 2.15 लाख से ज्यादा हरे-भरे पेड़ हैं। इन सबके कटने का अंदेशा है। इसके विरोध में देश व्यापी आंदोलन हो रहे हैं।
नागरिक उपभोक्ता मार्ग दर्शक मंच के अध्यक्ष और बुंदेलखंड में पर्यावरण बचाने के लिए सक्रिय डॉ. पीजी नाजपांडे ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में रिट दायर करके हीरा खनन पर रोक लगाने की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने मंगलवार (26 अक्टूबर) को बकस्वाहा जंगल में खनन पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है।
इसके अगले ही दिन श्री नाजपांडे को एक और सफलता मिली। उनके द्वारा आतिशबाजी से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण के विरुद्ध दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद एनजीटी ने 27 अक्टूबर (बुधवार) को आदेश जारी कर खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों में पटाखों पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
इसके अलावा जहां वायु गुणवत्ता मध्यम (मॉडरेट) है वहां सिर्फ ग्रीन पटाखों की दो घंटे के लिए अनुमति दी है। एनजीटी ने अपने आदेश में क्रिसमस और नए वर्ष में दोपहर 11:55 से 12:30 बजे तक सिर्फ ग्रीन पटाखों की अनुमति दी है।
यह आदेश एनजीटी के न्यायाधीश शिव कुमार सिंह (न्यायायिक सदस्य) और डॉ. अरुण कुमार वर्मा (विशेषज्ञ सदस्य) की दो सदस्यीय बेंच ने दिए हैं। याचिका की पैरवी अधिवक्ता प्रभात यादव ने की। डॉ. नाजपांडे के साथ रिट दायर करने में रजत भार्गव भी शामिल रहे।
अन्य अवसरों पर लेनी होगी डीएम से अनुमति
बांदा। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि त्योहारों के अलावा सीमित अवधि के लिए पटाखों का उपयोग करने को जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जिला मजिस्ट्रेट अनुमति देंगे। एनजीटी ने कहा कि चूंकि अभी महामारी जारी है और बढ़ रही है। पटाखों से प्रदूषण में वृद्धि होगी।
ग्रीन पटाखों में नहीं होते कई नुकसानदेह तत्व
बांदा। ग्रीन पटाखे केमिकल युक्त पटाखों से अलग होते हैं। बताते हैं कि इनसे 30 से 40 फीसदी तक प्रदूषण कम होता है। इसमें किसी प्रकार का एल्यूमोनियम, बेलियम, पोटेशियम नाइट्रेट और कार्बन शामिल नहीं होता। अगर होता भी है तो बहुत कम। दिखने में यह सामान पटाखों की तरह होते हैं। फुलझड़ी, चकरी, फ्लावर पॉट, स्काई शॉट आदि पटाखे शामिल है।