खदानों के रास्ते में खड़ी ओवरलोड ट्रकों की कतार। संवाद
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बांदा। ये अजब और गजब है कि खदानों में भारी भरकम मशीनों से रात दिन खनन और ओवर लोडिंग बदस्तूर चल रही है। खनन करा रही कंपनियों के खजाने भर रहे हैं। दूसरी तरफ रायल्टी के रूप में सरकार को मिलने वाला राजस्व घट रहा है। तमाम कवायदों के बाद भी खनिज विभाग रायल्टी का लक्ष्य पूरा कर पाने में नाकाम हो रहा है। राजस्व लक्ष्य के ताजे आंकड़े इसके गवाह हैं। रायल्टी लक्ष्य से आधी भी नहीं जमा हो पा रही।
बांदा जनपद में लगभग 2 दर्जन खदानों में खनन चल रहा है। देश की कई नामी गिरामी कंपनियां पट्टा लिए हुए हैं। पट्टे की प्रक्रिया और शर्तों में यह शामिल है कि माइनिंग प्लान में यह तय होता है कि खदान से कितना खनिज निकाला जा सकता है। लेकिन अधिकांश खदानों में ऐसा नहीं हो रहा है।
वैध से कई गुना ज्यादा अवैध खनन हो चुका है और हो रहा है। रात दिन खदानों में भारी भरकम और प्रतिबंधित मशीनों से बालू निकालकर हजारों ट्रक रोजाना प्रदेश के विभिन्न नगरों में बालू ढुलाई कर रहे हैं। इन ट्रकों से खदानों में रायल्टी सहित कई मद के नाम पर मोटी कीमत वसूली जा रही है।
दूसरी तरफ खनिज विभाग का खजाना खाली है। लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा। जबकि पूर्व के वर्षों में लक्ष्य से ज्यादा रायल्टी/राजस्व जमा होता रहा है। चालू वर्ष 2022 में जनवरी में 40 करोड़ राजस्व जमा कराने का लक्ष्य था, लेकिन जमा सिर्फ 14.44 करोड़ (36 प्रतिशत) ही हुआ।
इसी तरह बीते माह फरवरी में भी 40 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन वसूली सिर्फ 18.81 करोड़ (47 फीसदी) ही हुई। पिछले वर्ष 2020-21 में फरवरी माह में 34 करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष 31.67 करोड़ (93 प्रतिशत) राजस्व जमा हुआ था। पिछले पूरे वर्ष में 3 अरब 40 करोड़ का लक्ष्य था।
इसमें 2 अरब 41 करोड़ 71 लाख रुपये (71 प्रतिशत) जमा हुए थे। इस वर्ष 2021-22 में कुल 4 अरब रुपये का वार्षिक लक्ष्य है। बीते फरवरी माह तक 45.24 फीसदी जमा हुआ है। पिछले महीने डीएम ने खुद कई खदानों में रात को छापे मारे और ओवर लोडिंग पकड़ी। खनिज अधिकारी सौरभ गुप्ता का कहना है कि अवैध खनन और ओवर लोडिंग के विरुद्ध लगातार अभियान चल रहा है।
पोकलैंड मशीन से केन नदी खदान में हो रहा खनन। संवाद - फोटो : BANDA