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राजनीति के कई पुरोधा अबकी नहीं आएंगे नजर

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विवेक सिंह - फोटो : BANDA
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बांदा। विधान सभा चुनाव अबकी कई मायनों में अलग और अजब होंगे। एक तरफ जहां कोरोना महामारी से चुनाव प्रचार बदला सा नजर आएगा वहीं पहली बार कई ऐसे दिग्गज और राजनीति के पुरोधा चुनावी परिदृश्य और अखाड़े से नदारद रहेंगे, जिन्होंने कई-कई बार विधान सभा चुनाव जीते और हारे। बांदा सदर सीट इसकी खास मिसाल बनेगी। चार बार चुनाव जीते और दो बार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे जमुना प्रसाद तथा तीन बार विधायक चुने गए और एक बार राज्य मंत्री रहे विवेक कुमार सिंह के बिना यह पहला चुनाव होगा।
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पिछले 2017 के विधान सभा चुनाव से अगले माह होने वाला 2022 का आम चुनाव काफी निराला है। खासकर यह चुनाव उन दिग्गजों से सूना रहेगा जो चुनाव में चर्चा में रहकर हलचल मचाते थे। ये बानगी चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय की बांदा सदर सीट में खासतौर पर है। बुंदेलखंड के गांधी कहे जाने वाले वरिष्ठ और मशहूर समाजवादी नेता जमुना प्रसाद बोस इस बार नहीं हैं। पिछले वर्ष वह दिवंगत हो चुके हैं।
बोस विधान सभा चुनाव के इतिहास में सबसे ज्यादा चर्चित शख्सियत थे। वह बांदा से चार बार चुनाव जीते। दो बार प्रदेश के कबीना मंत्री रहे। 1978 में मुख्यमंत्री रामनरेश यादव और 1989 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकारों में मंत्री रहे। पहला चुनाव 1974 में सोशलिस्ट पार्टी से लड़कर जीते। ईमानदारी के लिए बेमिसाल बोस कुछ चुनाव हारे भी। 1980 में कांग्रेस के चंद्रप्रकाश शर्मा से और उसके बाद विवेक सिंह से उन्हें शिकस्त मिली। सीपी शर्मा और विवेक सिंह दोनों ही कांग्रेस प्रत्याशी थे।
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सदर सीट के दूसरे दिग्गज विवेक कुमार सिंह हैं। यह भी विधान सभा चुनाव का चर्चित चेहरा हुआ करते थे। जब प्रदेश में कांग्रेस की दाल पतली और हवा खराब थी, उस दौर में भी विवेक ने कांग्रेस के टिकट पर जीत का परचम लहराया। अपनी कार्य प्रणाली से मतदाताओं का दिल जीता। विवेक तीन बार विधायक बने। एक बार राज्यमंत्री भी रहे। हालांकि दो चुनाव हारे भी।
कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने के बाद तिंदवारी से बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़ा। यहां कामयाबी नहीं मिली। पिछले 2017 के चुनाव में मौजूदा विधायक प्रकाश द्विवेदी से विवेक सिंह शिकस्त खा गए। अब जबकि चुनावी चर्चाएं आम हो चुकी हैं ऐसे में मतदाता और सियासी दलों के कार्यकर्ता दोनों दिग्गजों की याद करते हैं।
अबकी इनकी भी महसूस होगी चुनाव में कमी
बांदा। मौजूदा विधान सभा चुनाव और भी कई वरिष्ठ नेताओं से विहीन रहेगा। इनमें पूर्व सांसद श्यामाचरण गुप्त व रामनाथ दुबे और पूर्व विधायक व लंबे अरसे तक कांग्रेस जिलाध्यक्ष रहे रामेश्वर प्रसाद और पूर्व विधायक पुरुषोत्तम द्विवेदी (नरैनी) भी शामिल हैं। इनके अलावा पूर्व विधायक हरवंश प्रसाद पांडेय (नरैनी), पूर्व विधायक देशराज सिंह (करहुली, बबेरू), पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कुशजध्वज सिंह उर्फ छुट्टन भी अब नहीं रहे। नगर पालिका पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज फारुकी उर्फ हफीज चचा और पूर्व चेयरमैन सुधा सिंह चौहान की भी कमी इस चुनाव में महसूस की जाएगी।
रैली और जनसभाओं का नहीं रहेगा शोर
बांदा। चुनावी इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी भी छोटे-बड़े दलों की छोटी-बड़ी रैलियां या चुनावी जनसभाओं से चुनाव क्षेत्र सूने रहेंगे। प्रत्याशी भी लाव-लश्कर लेकर मतदाताओं की ड्योढ़ी पर दस्तक नहीं दे सकेंगे। उन्हें पांच लोगों के साथ ही वोट मांगने जाना होगा। प्रचार से लेकर मतदान और मतगणना तक कोविड गाइड लाइन की शर्तों का असर दिखेगा।

जमुना प्रसाद - फोटो : BANDA

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