मंडी समिति की आढ़त में अनाज की छनाई करते मजदूर।
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बांदा। चुनाव के लिए अधिग्रहीत कर लिए जाने पर व्यवसाय से वंचित हो गई मुख्यालय की मंडी समिति 20 दिन बाद फिर आबाद हो गई। यहां कारोबार करने वाले व्यापारियों के मुताबिक, इस अवधि में लगभग 20 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। लगभग 163 गल्ला और सब्जी की दुकानें प्रशासन ने अपने कब्जे में ले रखी थीं। बंदी के दौरान 10 से 15 लाख रुपये मंडी शुल्क का नुकसान हुआ है।
परमपुरवा निवासी किसान शमीम ने बताया कि वह 20 दिन से मटर की फसल घर में रखे थे। बाजार में बेचने की हिम्मत नहीं पड़ी। मंडी के बाहर आढ़ती मनमाना रेट लगाते हैं। तौल में भी कटौती करते हैं। अब मंडी खुलने पर यहां मटर बेचने आए हैं। जौरही गांव निवासी किसान शोभाराम ने बताया कि मंडी के बाहर गल्ला बेचने में नुकसान उठाना पड़ता है।
भाड़ा भी अधिक लग जाता है और फसल के सही दाम भी नहीं मिलते। शनिवार को आढ़तियों के यहां खरीद और अनाज की छनाई आदि का काम चलता रहा। गल्ला व्यापारी विष्णु गुप्ता, रमाकांत गुप्ता, रामबाबू गुप्ता, अशोक कुमार गुप्ता आदि ने बताया कि चुनाव के दौरान 20 दिन मंडी बंद रहने से लगभग 20 करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ है।