बांदा। महालक्ष्मी की उपासना कर महिलाओं ने यश व वैभव की कामना की। पर्व
शहर व ग्रामीण इलाकों में उत्साहपूर्वक मनाया गया। महिलाओं ने 24 घंटे का
निर्जल उपवास रख सुबह तालाब, नदी व सरोवरों में स्नान-दान कर अर्घ्य दिया।
सामूहिक रूप से महालक्ष्मी की कथा सुनकर पकवान चढ़ाए।
महिलाओं
ने सोमवार को सुबह तालाबों में सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर निर्जल उपवास
तोड़ा। नवाब टैंक में तड़के से ही व्रत रखने वाली महिलाओं का जमघट लगा।
पुरोहितों से महालक्ष्मी का पूजन कराया। लक्ष्मी के वाहन मिट्टी से बनाए गए
हाथी के पुतले का विधि-विधान से पूजन किया।
समूह में बैठकर कथा
सुनी और प्रसाद, दूब, फल-फूल अर्पित किया। केन नदी में भी महिलाओं ने
स्नान-दान कर व्रत पारायण किया। परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।
उधर, पितृपक्ष के 8वें दिन तिल व जल तर्पण कर लोगों ने पुरुषों से परिवार
के सुख-शांति की कामना की। गरीबों व ब्राह्मणों को भोजन कराया।