बांदा। ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत सरकारें भले न मानें, लेकिन जिस तरह से ऑक्सीजन प्लांट मंजूर कर स्थापित किए जा रहे हैं, इससे साफ है कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन का भीषण संकट था।
बानगी के तौर पर बांदा में मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल समेत चार ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने की मंजूरी मिली। इनमें दो पूरी तरह तैयार हो गए हैं। दो में उपकरण लगाने का काम चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अब मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन द्वारा वृहद निर्माण मद से लगभग पौने दो करोड़ की लागत का ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट स्थापित किया गया है। इसकी क्षमता लगभग एक हजार एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) है। यहां से मेडिकल कॉलेज के वार्डों में चार सौ बेडों तक ऑक्सीजन पहुंचेगी।
प्लांट चालू हो चुका है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में स्थापित दूसरे ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट की क्षमता 650 एलपीएम है। यह भी लगभग तैयार है। सिर्फ फ्लो सेंसर आना बाकी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि सेंसर लेकर इंजीनियर जल्द आने वाले हैं।
साथ ही बूस्टर भी जेनरेशन प्लांट में लगाया जाना है। आर्डर हो चुका है। बूस्टर लगने के बाद प्लांट से सिलिंडरों में भी ऑक्सीजन भरी जा सकेगी। उधर, जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री केयर फंड से डीआरडीओ द्वारा स्थापित किए जा रहे पीएसए (प्रेशर स्विंग एडजॉर्पशन) ऑक्सीजन प्लांट भी जल्द शुरू हो जाएगा।
मंगलवार की देर शाम नोएडा से यहां उपकरण आ गए हैं। इंजीनियरों की टीम ने मशीनों को लगा दिया है। प्लांट शुरू होने पर अस्पताल और ट्रामा सेंटर के सभी बेडों में मरीजों को आसानी से ऑक्सीजन मिल सकेगी। नरैनी सीएचसी परिसर में स्थित ऑक्सीजन प्लांट भी तैयार है।
टेस्टिंग भी हो चुकी है। अब सिर्फ हरी झंडी का इंतजार है। चिकित्साधिकारी डॉ. बीएस राजपूत ने बताया कि 50 बेड के हिसाब से 95 सेचुरेशन क्षमता का प्लांट है। बेडों तक बिछी ऑक्सीजन सप्लाई लाइन की भी जांच हो चुकी है।
चारों प्लांट शुरू होने के बाद ऑक्सीजन कमी का संकट नहीं रहेगा। अभी सिलिंडर से ऑक्सीजन मरीजों को दी जा रही है। जल्द सिलिंडर के बजाय पाइपलाइन से बेडों तक प्लांट से ऑक्सीजन पहुंचेगी। मरीजों को पर्याप्त और आसानी से ऑक्सीजन मिलने लगेगी। सभी प्लांट अलग-अलग क्षमता के हैं।
-डा. वीके तिवारी, सीएमओ।