बांदा। हफ्ते भर से हड़ताल के चलते सहकारी समितियों में तालाबंदी से जिले की 46 सहकारी समितियों और 10 खरीद केंद्रों में समिति के सदस्य किसानों को खाद नहीं मिल पा रही। बुआई का सीजन तेजी से बीत रहा है। किसान परेशान हैं। सहकारी कर्मी मुख्यालय स्थित विकास भवन पर एक सप्ताह से धरने पर बैठे हैं।
सहकारी कर्मचारी दो सूत्री मांगों को लेकर 1 नवंबर से हड़ताल पर हैं। जिले में 46 सहकारी समितियों सहित 10 धान खरीद केंद्रों पर ताला जड़ दिया है। किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग ने जिन प्राइवेट दुकानों को खाद वितरण के लिए अधिकृत किया है, वह मनमाने दामों पर खाद बेच रहे हैं। अधिक मूल्य लेकर रसीद निर्धारित मूल्य की दी जा रही है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि खाद की किल्लत खत्म करने के लिए अतर्रा और बबेरू सहकारी समिति केंद्र, कृषक सेवा केंद्र, एग्रीजंक्शन सहित निजी क्षेत्र इफ्को के 35 विक्रेताओं को खाद बिक्री की अनुमति दी गई है। कृषि अधिकारी का दावा है कि किसानों को फिलहाल खाद की कोई दिक्कत नहीं है।
दुकानदारों को चेतावनी दी गई है कि महंगे दामों पर खाद बेची तो लाइसेंस निरस्तीकरण के साथ ही एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उधर, सहकारी कर्मी विकास भवन पर धरने पर आठवें दिन भी बैठे रहे।
उनकी मांग है कि नियमित वेतन का भुगतान करने सहित पैक्स कैडर सचिवों की सहकारी निरीक्षक वर्ग-2 व नॉन कैडर सचिवों/प्रभारी सचिवों की कैडर सचिव पद पर पदोन्नति दी जाए। धरने में अध्यक्ष मनोज कुमार त्रिपाठी, महामंत्री जितेंद्र कुमार द्विवेदी, विनोद कुमार श्रीवास्तव, राकेश सिंह, बासुदेव सिंह, पवन तिवारी, आनंद सिंह, जितेंद्र भदौरिया आदि मौजूद रहे।