बांदा। कोरोना जैसी महामारी के बीच लोगों का रुझान होम्योपैथी की ओर बढ़ रहा है। पिछले दो साल के आंकड़ों से यही संकेत मिला है। इस पद्धति के बारे में कहा जाता है कि यह बीमारियों को जड़ से मिटा देती है। जिले में होम्योपैथिक से इलाज कराने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वर्ष 2020 में जिले में 1.58 लाख लोगों ने होम्योपैथिक इलाज कराया था। वर्ष 2021 में यह बढ़कर 2.20 लाख हो गया। जिला होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार दुबे ने बताया कि होम्योपैथी के जनक जर्मनी निवासी सीएफ हैनीमेन थे। उनका जन्म 10 अप्रैल को हुआ था।
उन्हीं की याद में हर साल 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। साथ ही इस दिन होम्योपैथी को आगे ले जाने और भविष्य की चुनौतियों को समझने के लिए चर्चा होती है। डॉ. दुबे ने बताया कि कई जटिल बीमारियों का इलाज होम्योपैथी से हुआ है।
इसका कोई नुकसान नहीं है। बीमारियों को यह जड़ से मिटाती है। टांसिल बढ़ना, नाक में मांस बढ़ना, गुर्दे और पित्ताशय की पथरी, पाइल्स, गदूद बढ़ना, छाती में गांठ आदि बीमारियां होम्योपैथिक दवाओं से जल्दी ठीक हो जाती हैं। चर्म रोग, जोड़ों का दर्द, कैंसर, पेट रोग में भी होम्योपैथी इलाज बेजोड़ है।
होम्योपैथी अधिकारी ने बताया कि जिला अस्पताल समेत जिले में 26 होम्योपैथिक अस्पताल चल रहे हैं। मार्च 2020 से मार्च 2021 तक 79 हजार नए मरीज जुड़े। कुल 1.58 लाख लोगों ने होम्योपैथी का लाभ लिया। कई मरीजों ने होम्योपैथिक से मिले लाभ की जानकारी शेयर भी की है।