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फूला के हौसले के आगे हार गया कैंसर और कोरोना

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फूला देवी को प्रशस्ति पत्र देते डीएम अनुराग पटेल। - फोटो : BANDA
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बांदा। कैंसर की तीसरी स्टेज से गुजर रही उम्रदराज महिला को डाक्टर यह कह दे कि अब वह चंद दिन की मेहमान हैं तो स्वाभाविक है कि निराश और हताश होकर वह पलंग पर लग जाएंगी, लेकिन इस बात को बड़ोखर गांव की फूला देवी ने पूरी तरह गलत साबित कर दिया।
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10 साल पहले डॉक्टरों ने उन्हें चंद दिन का मेहमान बताया था। उसके बाद वे कैंसर के प्रति जागरूकता अभियान और लोगों की नि:स्वार्थ सेवा में ऐसी जुटीं कि पता ही नहीं चला कि कैंसर कब उनके हौसले से हार गया। कैंसर का पता चलने के बाद उन्होंने कई ऐसे काम कर दिखाए जो बहुत ही दुर्लभ हैं।
माता-पिता की मृत्यु के बाद खड्डिहा पुरवा (महुआ) स्थित ननिहाल में फूला का बचपन बीता। यहां 8वीं तक पढ़ाई की। मामा की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। फूला उनका हाथ बंटातीं और रात में दीपक रखकर पढ़ाई करतीं। सुबह स्कूल जातीं। 8वीं तक पढ़ाई के बाद 14 वर्ष की उम्र में फूला देवी की शादी बड़ोखर गांव में निर्धन परिवार के कल्लू प्रसाद यादव से हो गई।
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यहां भी आर्थिक तंगहाली ने पीछा हीं छोड़ा। फूला ने पति के साथ कंडा और दूध बेचने का काम किया। मेहनत रंग लाई। धीरे-धीरे एक और फिर दो भैंस खरीद लीं। पांच बीघा जमीन भी हो गई। फूला ने गांव बड़ोखर स्थित ससुराल में साक्षरता अभियान की शुरुआत की। गांव की लगभग 80 औरतों को साक्षर बनाया।
53 महिलाओं को जोड़कर एक स्वयं सहायता समूह गठित कर स्वर्ण जयंती योजना से जोड़ दिया। इन सभी महिलाओं को एक-एक भैंस और 25 हजार रुपये मिले। मात्र 8वीं तक पढ़ी फूला की इस अद्भुत सेवा पर तत्कालीन राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने सम्मानित किया।
फूला को बीमार और लावारिस मरीजों की सेवा का जुनून है। कई ऐसे मरीजों की तीमारदारी की जो सड़क पर फुटपाथ में पड़े मौत की राह ताक रहे थे। वर्ष 2012 में फूला देवी को लिवर कैंसर हो गया। मुंबई में डाक्टरों ने देखकर कहा कि कैंसर थर्ड स्टेज में है। अब आप ज्यादा दिन की मेहमान नहीं हैं। डाक्टरों की यह बात फूला का हौसला तनिक भी डिगा नहीं सकी। गांव लौटकर उन्होंने और तेजी से समाज सेवा का काम शुरू कर दिया।
गांव में बंद कराया शराब का ठेका और जुआ
इसी बीच गांव में पति के शराब की आदत से तंग आकर महिला ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली। फूला इससे बहुत दुखी हुईं। उन्होंने गांव में शराब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गांव की महिलाओं को लेकर गांव की शराब की दुकान पर धावा बोला और दारू की बोतलों में आग लगा दी। गांव में शराब बिकना बंद हो गई। फूला ने महिलाओं के साथ जुआ खेलने वालों की भी खबर ली। उनको सरेआम बेइज्जत किया। ऐसे में गांव में जुए की फड़ें बंद हो गईं।
कोरोना में खुद का बनाया सैनिटाइजर बांटा
10 साल से कैंसर की गंभीर रोगी फूला देवी ने कोरोना काल में भी अपना कौशल दिखाया। अपने हाथों से एलोवेरा का सैनिटाइजर बनाया और लोगों को नि:शुल्क बांटा। लॉकडाउन में मजदूरों को खाना वितरित किया। इस समाज सेवा में फूला भी कोरोना पॉजिटिव हो गईं। कैंसर पीड़ित को कोरोना गंभीर बात थी, लेकिन फूला ने कोरोना को मात दिया। अभी भी फूला अपने जज्बे के साथ जनसेवा में जुटी हुई हैं। उन्हें पूर्व में दो डीएम योगेश कुमार व हीरालाल सम्मानित कर चुके हैं। गुरुवार (7 अप्रैल) को मेडिकल कालेज सभागार में फूला देवी को उनकी इन सेवाओं के लिए डीएम अनुराग पटेल ने भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

फुटपाथ पर लावारिस पड़े मरीज को नहलातीं फूला देवी। (फाइल फोटो) - फोटो : BANDA

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