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पांच बच्चियों संग डाली नींव, फिर बन गई बुलंद इमारत

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बालिकाओं को नृत्य का प्रशिक्षण देतीं निशा गुप्ता। - फोटो : BANDA
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बांदा। ननिहाल के एक मंदिर में 22 वर्ष पहले सिर्फ 5 बालिकाओं से नृत्य कला सीखने-सिखाने की डाली गई नींव आज बुलंद इमारत का रूप ले चुकी है। दो दशकों के इस दौर में अब तक नृत्य डांस सहित कई हस्तकलाओं में माहिर होने वाली महिलाओं और बालिकाओं की संख्या का ग्राफ 10 हजार का आंकड़ा पार कर चुका है। खास बात यह है कि अधिकांश बालिकाओं/महिलाओं को यह हुनर नि:शुल्क मिला है। इसीलिए इन महिलाओं और बालिकाओं की भारी भरकम फौज अपनी नृत्य गुरु निशा गुप्ता को सिर आंखों पर बिठाए है।
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शहर के छोटी बाजार निवासी निशा गुप्ता अब पूरे जनपद की महिलाओं और बालिकाओं के बीच एक पहचान बन चुकी है। उनके एसीडी स्टूडियो में रोजाना बालिकाएं और महिलाएं डांस, नृत्य, ड्राइंग, मार्शल आर्ट आदि के हुनर सीख रही हैं। मुख्य फोकस क्लासिकल (कथक) डांस पर है।
मूलरूप से निशा का परिवार जनपद के अतर्रा का रहने वाला है। बताती हैं कि जब वह 10वीं कक्षा में थीं और उनका भाई 8वीं में था तो मम्मी सिलाई कर पढ़ाई का खर्च पूरा करती थीं। लेकिन हार्ट की मरीज होकर वह चल बसीं। तब हम दोनों भाई-बहनों की परवरिश ननिहाल में नाना-नानी ने की। नृत्य का शौक शुरू से था। इसलिए वह यह सीखने मुंबई चली गई। वहां उस जमाने के मशहूर रियलिटी शो बूगी-वूगी के गुरु बिट्टू सिंह से डांस की कला सीखी।
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फिर वापस ननिहाल आकर नजदीक स्थित मंदिर में गिनीचुनी बालिकाओं को नृत्य कला सिखाने की शुरूआत की। निशा की शिष्याएं आए दिन अपनी मेधा/कला का देश के विभिन्न हिस्सों में डंका बजा रही हैं। शादी हो जाने पर दूरदराज चली गईं शिष्याएं अभी भी मायके आती हैं तो पहले अपनी नृत्य गुरु के घर दस्तक देती हैं। निशा अपने पति मुकुल गुप्ता और 14 वर्षीय पुत्र व 9 वर्षीय बेटी के साथ गृहस्थ जीवन के साथ अभी भी अपना पूरा समय महिलाएं और बालिकाओं को हस्तकला, नृत्य, राइटिंग आदि में व्यतीत कर रही हैं।
नृत्य गुरु निशा को अब तक मिले सम्मान
1. उत्तर प्रदेश मलाला सम्मान। 2. उत्तर प्रदेश नारी शक्ति सम्मान। 3. बुंदेलखंड श्रेष्ठ नृत्य गुरु सम्मान। 4. संपूर्णा गौरव सम्मान। 5. द कंपलीट वूमेन अवार्ड (सुपर स्टार गोविंदा द्वारा प्रदत्त)। 6. काव्यांजलि अटल साधना सम्मान। 7. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सम्मान। 8. वंदे भारतम सम्मान।
निशा का संदेश
निशा गुप्ता कहती हैं कि जीवन में समस्याएं और संघर्ष सभी के साथ हैं। 90 फीसदी महिलाएं कड़ा संघर्ष कर कोई न कोई मुकाम हासिल करती हैं। वह (निशा) खुद इसकी बानगी हैं। शुरूआत में उनके नृत्य के शौक पर आपत्तियां जताई गईं, लेकिन कहते हैं कि अच्छी सोच और ईमानदारी के साथ किया गया काम सफल साबित होता है। बालिकाओं और महिलाओं को चाहिए कि इसी सोच के साथ अपने कॅरियर को उज्ज्वल करें।
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