Charges seven percent facility fee, does not provide facilities
- फोटो : BANDA
बांदा। यात्रियों से किराये के साथ सात प्रतिशत यात्री सुविधा शुल्क लेने के बाद भी सुविधाएं नदारद हैं। राजकीय परिवहन निगम बांदा की बसों में यात्रा करना जोखिम और मशक्कत भरा है। बस स्टैंड में पीने के पानी व महिलाओं के शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। स्टील की कुर्सियों में धूम जमा है। खटारा बसों में शीशे न होने से यात्री लू के थपेड़े सहते हैं।
परिवहन निगम यात्रियों से 40 से 200 किलोमीटर तक की यात्रा पर 90 पैसे और 200 किलोमीटर से ऊपर 1.50 रुपये प्रति यात्री सुविधा शुल्क लेता है। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में परिवहन निगम लगभग 400 बसों के बेडे़ से रोजाना औसतन 20 लाख रुपये यात्रियों से किराये के रूप में कमाता है। सात फीसदी की दर से इसमें दो लाख 85 हजार रुपये यात्री सुविधा शुल्क के होते हैं। इसी टैक्स से यात्रियों को सुविधाएं और क्लेम का भुगतान आदि होता है।
इन दिनों भीषण गर्मी और लू के मौसम में शादी की सहालग हैं। यात्रियों की संख्या काफी बढ़ी हुई है। लेकिन बांदा डिपो बस अड्डे में यात्रियों को कोई सुविधा नहीं है। बस स्टैंड में लगाई गई स्टील की गिनी-चुनी कुर्सियों पर ज्यादातर में रोडवेज परिचालक, चालक व अन्य कर्मचारियों का कब्जा रहता है। अन्य पुरुष-महिला यात्री जमीन पर बैठकर बसों की प्रतीक्षा करते हैं।
दूसरी तरफ अधिकांश बसें बेहद खटारा हैं। खासतौर पर जनपद के अंदर कस्बों और गांवों में चलने वाली बसें टूटी-फूटी और शीशा विहीन हैं। भरी दोपहर में इन बसों में यात्रा करते समय यात्रियों को लू के थपेड़ों से सहना पड़ता है। खुले में बसें घंटों खड़ी रहती हैं। जिससे वह गर्म हो जाती हैं। यात्रियों को बैठने के पहले सीटों पर पानी डालना पड़ता है। कभी-कभी तो बसें बीच रास्ते में ही बंद हो जाती हैं और यात्रियों को बीच रास्ते में ही बसों को धक्का लगाना पड़ता है। बस अड्डे में पीने को ठंडा पानी भी नहीं है। यात्री पानी खरीद कर प्यास बुझाते हैं।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक बस स्टैंड में यात्रियों के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था की जाए। जल्द शासन से 200 नई बसें मिलने वाली हैं। पुरानी बसों को बेड़े से हटा दिया जाएगा। बस स्टैंडों में यात्रियों के बैठने के लिए और कुर्सियां लगवाई जाएंगी। - अशोक कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक चित्रकूटधाम मंडल, बांदा