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बुंदेली फलों पर कुदरत की मार, अमरूद पहुंचा सेब के भाव

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नरैनी में फल बेचता दुकानदार। - फोटो : BANDA
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नरैनी। कोरोना महामारी के दौर में बुंदेलखंड में बागवानी भी बुरी तरह प्रभावित हुई। यहां के कुछ परंपरागत फलों पर भी इसकी मार पड़ी है। बीते दो वर्षों में अमरूद, बेर और महुआ आदि स्थानीय मौसमी फलों की पैदावार में भारी गिरावट आई है। इसका सीधा असर इनकी कीमतों पर पड़ा है। अमरूद यहां 60 से 80 रुपये किलो के भाव बिक रहा है। यह कमोवेश सेब की कीमत के बराबर है। दूसरी तरफ बुंदेली धरती में पैदा होने वाले अमरूद का स्थान महाराष्ट्र से मंगाए जा रहे अमरूद ने ले रखा है।
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अमरूद बुंदेलखंड का खास पसंदीदा और पैदा होने वाला मौसमी फल है। मौजूदा मौसम इसी का है। लेकिन बाजार से नदारद है। वरना इन दिनों में यह कौड़ियों के मोल मिलता था। नरैनी में अमरूद का बगीचा किए सुंदरलाल और चंद्रदत्त त्रिपाठी ने बताया कि यह स्थिति पिछले दो सालों से पैदा हुई है।
न जाने क्यों अमरूद का फल बहुत कम लग रहा है। हालांकि ऐसा कोई बड़ा जलवायु परिवर्तन भी नजर नहीं आ रहा है। कयास लगाया जा रहा है कि कोरोना काल में अमरूद, बेर, महुआ आदि की उपज कम हुई है। यहां फल विक्रेता अजीम मोहम्मद ने बताया कि मौसमी फलों की मांग है। लेकिन स्थानीय फल नहीं आ रहे।
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ऐसे में मजबूरन अमरूद महाराष्ट्र से मंगाना पड़ रहा है। इसके अलावा बेर, केला, तरबूज, अनार, संतरा आदि की आवक भी महाराष्ट्र से हो रही है। फल विक्रेता ने कहा कि अमरूद और बेर कभी एक साथ नहीं बिके। इन दोनों का सीजन ही अलग है। पर बाहर से आने वाला यह फल अब साथ बिकने का संयोग है। हालांकि इनका स्वाद स्थानीय अमरूद व बेर जैसा नहीं है।
कुछ प्रमुख फलों के मौजूदा भाव (प्रति किलो)
अमरूद - 60 से 80 रुपये
एप्पल बेर - 40 रुपये
सेब - 80 रुपये
अनार - 80 रुपये
खरबूज - 80 रुपये
संतरा - 60 रुपये
अंगूर - 60 रुपये
तरबूज - 40
पपीता - 30 रुपये
फलों की खेती घाटे का सौदा
बुंदेलखंड के प्रगतिशील किसान असलम खां (छनेहरा लालपुर) ने बताया कि फलों की खेती इस समय घाटे का सौदा साबित हो रही है। उत्पादकों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। इसके चलते किसानों का रुझान बागवानी से हट रहा है। उन्होंने बताया कि उद्यान फसलों के लिए सरकार ने योजना लागू की है।
इसमें एक हेक्टेयर में बागवानी लगाने पर किसान को तीन साल तक 6000 रुपये प्रति माह मिलेंगे। असलम ने कहा कि हालांकि यह भी नाकाफी है। सरकार को चाहिए कि अन्य प्रदेश की तरह हर ब्लाक स्तर पर हाट बाजार की व्यवस्था करे जिसमें किसान अपने फलों का खुद मूल्य निर्धारित करके उचित लागत और मुनाफा कमा सके।
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प्रगतिशील किसान असलम। - फोटो : BANDA

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