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भारत बंद... धरना और ज्ञापन में निपटा

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बांदा। किसान संगठनों का तीन कृषि कानूनों के विरोध में भारत बंद का आह्वान जिले में महज धरना और ज्ञापन में ही निपट गया। बाजार रोजमर्रा की तरह खुला रहा। व्यापारियों और दुकानदारों ने भी भारत बंद पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
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कुछ किसान नेता बाजार बंद कराने के लिए निकले और बंद करने की अपील की, लेकिन व्यापारियों ने उनकी अपील को नजरंदाज कर दिया। अलबत्ता एहतियात के तौर पर बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष रूप से सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस तैनात रही।
नतीजे में भारत बंद यहां शांति पूर्ण ढंग से निपट गया। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) और संयुक्त किसान मोर्चा बैनर तले किसान सभा हुई। बुंदेलखंड किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
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केस-एक
न्यूनतम समर्थन मूल्य की दी जाए गारंटी
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) बैनर तले किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री को संबोधित छह सूत्री ज्ञापन डिप्टी कलक्टर को सौंपा। इसमें कहा कि कृषि कानूनों की वापसी को लेकर करीब 10 माह से किसान आंदोलनरत हैं, लेकिन किसानों की मांगें नहीं मानी जा रही हैं।
ज्ञापन में तीनों कृषि कानून वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, बिजली के निजीकरण पर रोक, कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली, डीजल, पेट्रोल व गैस सिलिंडर के दामों में कमी, अन्ना मवेशियों को संरक्षित करने, प्रति एकड़ की दर से किसानों को सम्मान निधि देने आदि मांगें शामिल रहीं।
प्रदर्शन और ज्ञापन में बैजनाथ अवस्थी, बलराम तिवारी, विनोद कुमार सिंह, महेंद्र त्रिपाठी, रामदास साहू, बृजेश कुमार पटेल, चुन्नू सिंह, संदीप सिंह, जग प्रसाद, नवल द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।
केस-दो
निजी बीमा कंपनियों से वसूले जाएं अरबों रुपये
संयुक्त किसान मोर्चा ने संकट मोचन मंदिर के पास किसान सभा की। किसान नेताओं ने तीनों कृषि कानूनों का विरोध करते हुए वापस लेने की मांग की। चेतावनी दी कि केंद्र सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो संघर्ष जारी रहेगा।
डा. रामचंद्र सरस ने कहा कि सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी दे। किसान बीमा के नाम पर अरबों रुपये कमाने वाली निजी बीमा कंपनियों से धन वापस लेकर किसानों के खातों में भेजी जाए।
वकील जयनारायण, भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष हरदत्त पांडेय, मंडल अध्यक्ष बैजनाथ अवस्थी व उपाध्यक्ष बलराम तिवारी आदि ने भी संबोधित किया। बाद में जुलूस की शक्ल में कलक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित 12 सूत्री ज्ञापन डिप्टी कलक्टर को सौंपा।
इसमें दुर्घटना में किसान की मौत पर 10 लाख रुपये मुआवजा, 60 साल से ऊपर उम्र के किसानों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन, अन्ना मवेशियों से फसलें बचाने, नष्ट फसलों का मुआवजा जिम्मेदार अधिकारियों से वसूलने, किसानों के कर्ज माफ करने आदि मांगें शामिल रहीं।
दावा किया कि किसान संगठन मजदूर यूनियन, ट्रेड यूनियन, प्रगतिशील लेखक संघ, भवन निर्माण मजदूर संघ, राजनैतिक दल, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एसएल), जिला अधिवक्ता संघ आदि किसान आंदोलन का समर्थन किया है।
इस मौके पर जयकरण वर्मा, अमर सिंह, मदन भाई पटेल, रामप्रवेश यादव, श्यामसुंदर राजपूत, पुरुषोत्तम अवस्थी आदि उपस्थित रहे।
केस-तीन
बुंदेलखंड किसान यूनियन ने भी भेजा ज्ञापन
बुंदेलखंड किसान यूनियन राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल कुमार शर्मा की अगुवाई में किसानों ने राष्ट्रपति को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन कलक्ट्रेट में दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली के आह्वान पर उनके संगठन ने सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन और ज्ञापन दिया है।
मंडल मुख्यालय में दिए गए ज्ञापन में प्रमुख मांग काले कृषि कानून वापस लेने, एमएसपी पर कानून बनाने, बिजली बिल व पराली बिल 2020 रद्द करने, गोशालाओं का निर्माण कराने आदि शामिल रहीं।
इस अवसर पर अनिल मिश्रा, श्याम सरोज पाठक, मुन्ना तिवारी, दिनेश कुमार निरंजन, रामू पाठक, ननकू पाल, अनूपा सिंह, मोतीलाल द्विवेदी, मुकेश सिंह, राजाराम निषाद, रजमुन त्यागी, श्याम प्रताप सिंह, विनोद निषाद, आदित्य मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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