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धरा रह गया बैंक का कर्ज, बेटी की शादी का फर्ज

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बांदा। अन्नदाताओं ने खेत में लहलहाती फसलें देखकर बड़े-बड़े मंसूबे पाले थे। किसी को बैंक का कर्ज अदा करना था तो किसी को बेटी के हाथ पीले। एक हफ्ते पहले तक खेत में लहलहा रही फसलें इन उम्मीदों को परवान चढ़ा रही थीं। पर अचानक हुई मौसम की मार ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बैंक के कर्ज और बेटी की शादी का फर्ज अटक जाएगा।
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लघु किसान अशोक कुमार (जारी) ने 12 बीघा में चना और मटर बोया था। जुताई, बुवाई, खाद-बीज में 40 हजार रुपये खर्च आया। फसल की हालत देखकर लग रहा था कि दो लाख रुपये मिल जाएंगे। घर के कई काम पूरे हो जाएंगे। पानी के एक झटके ने सारे सपने तोड़ दिए। किसान मोतीलाल (जारी) ने डेढ़ बीघा में मसूर और चना बोया था। 15 हजार रुपये कर्ज लेकर खाद-बीज इत्यादि का बंदोबस्त किया था। अच्छी फसल के भरोसे बेटी निधि की शादी तय कर दी थी। ओला और अतिवृष्टि ने सबकुछ मटियामेट कर दिया।
किसान अशोक शुक्ला (गोधनी) ने अपनी पीड़ा यूं बयां की कि 14 बीघा में चना और लाही बोई थी। करीब 70 हजार रुपये खर्च आया था। फसल भी बढिय़ा थी। तीन लाख रुपये की आमदनी का भरोसा था। बेटे सूर्यांश की शादी का मन बना लिया था। अब सबकुछ नए सिरे से सोचना और जुगाड़ करना पड़ेगा। सिर्फ तीन बीघा की फसल में गुजारा कर रहे किसान कैलाश (पड़ुई) को सदमा है कि 20 हजार रुपये लागत लगाकर तीन बीघा में चना बोया था। फसल अच्छी नजर आ रही थी। बारिश के रूप में पड़ी कुदरत की मार से सब कुछ तबाह हो गया। घर के कई काम और सालभर का खर्च दूभर हो जाएगा।
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पिपरगवां (तिंदवारी) गांव के किसान रामगोपाल ने बताया कि सहकारी समिति से 20 हजार रुपये का लोन लेकर खुद के 4 बीघे व बटाई के 15 बीघे खेत में मटर, चना, मसूर व गेहूं की फसल बोई थी। 8 हजार रुपये सिंचाई में खर्च हुए। उम्मीद थी कि फसल तैयार होने के बाद लागत से कई गुना बचत होगी। पर पानी ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया। उस पर डेढ़ लाख रुपये बैंक का कर्ज भी है।
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