Banda Municipality President's rights restored
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बांदा। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मोहन साहू के वित्तीय अधिकार चार माह बाद बहाल हो गए। प्रदेश सरकार के आदेश को हाईकोर्ट ने न्याय के खिलाफ और न्याय के खिलाफ बताते हुए खारिज कर दिया है। कहा है कि बिना मस्तिष्क का उपयोग किए सरकार ने यह आदेश किया है। बिना गंभीर आरोप सिद्ध हुए चुने हुए जनप्रतिनिधि के इस प्रकार अधिकार नहीं छीने जा सकते।
सपा नेता और नगर पालिका अध्यक्ष मोहन साहू के प्रशासनिक अधिकार 25 अगस्त 2021 को प्रदेश शासन ने कई अनियमितताओं के आरोप में सीज कर दिए थे। इस पर साहू ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से रविनंदन के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर की थी।
16 दिसंबर को न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्र और न्यायाधीश विक्रम डी चौहान की बेंच ने सुनवाई के बाद अपने 13 पृष्ठीय आदेश में कहा है कि मोहन साहू द्वारा सरकार को दिए गए जवाब पर सरकार ने विचार नहीं किया। सिर्फ जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता को बिना सुने और सफाई का मौका दिए वित्तीय अधिकार सीज कर दिए। बेंच ने कहा कि 25 अगस्त को जारी किया गया आदेश बिना मस्तिष्क का उपयोग किए पारित किया गया है। जबकि पहले कारण बताओ नोटिस जारी करनी थी। बेंच ने याचिका में शामिल किए गए कई मुद्दों का भी उल्लेख किया है।
विधायक पर साधा निशाना
वित्तीय अधिकार बहाल हो जाने पर मंगलवार को नगर पालिका अध्यक्ष मोहन साहू ने भाजपा विधायक प्रकाश द्विवेदी पर निशाना साधा। अपने आवास पर आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि फर्जी आरोप लगाकर विधायक ने पावर सीज करा दिए थे। भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था। अध्यक्ष ने मंडलायुक्त और डीएम से अनुरोध किया कि शहर में बन रही सड़कों की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। यह रात में बनती है और सुबह उखडने लगती है। कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई भाजपा सरकार की अंधेरगर्दी का नमूना है।