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यमुना की बाढ़ में डूबा बांदा-बहराइच स्टेट हाईवे

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चिल्ला-बिंदकी के बीच कानपुर मार्ग पर यमुना नदी की बाढ़ का पानी। - फोटो : BANDA
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बांदा। यूपी-एमपी के कई इलाकों में हो रही जबरदस्त बारिश से यमुना और केन नदियों में और उफान आ गया है। चिल्ला घाट पर यमुना नदी खतरे के निशान से डेढ़ मीटर 101.50 मीटर ऊपर बह रही है। बांदा में केन का पैमाना बढ़कर 101.50 मीटर हो गया है। यमुना की बाढ़ से पैलानी, जसपुरा, चिल्ला और बबेरू इलाकों में दर्जनों गांवों का रास्ता बंद हो गया है। यहां बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई है।
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उधर, जनपद की सीमा पर स्थित ललौली के पास बांदा-बहराइच स्टेट हाईवे में यमुना का पानी भर जाने से इस मार्ग से कानपुर, लखनऊ का आवागमन ठप हो गया है। प्रशासन ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर भेजने के लिए नावों की व्यवस्था की है। उधर, मध्य प्रदेश की बारिश से गंगऊ और बरियारपुर बांधों से पानी के डिस्चार्ज में फिर वृद्धि हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ बुलेटिन में बताया गया है कि दोनों नदियों का जलस्तर फिलहाल बढ़ता रहेगा। बुधवार को यह 5-5 सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही थीं।
खप्टिहा कलां प्रतिनिधि के मुताबिक पैलानी, जसपुरा, खप्टिहा आदि क्षेत्रों में सबादा, महबरा, गलौली, बड़ागांव, नरी, सिंधन कलां, अदरी, बसधरी, पिपरोदर और पड़ोहरा आदि गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन गांवों में केन और यमुना का पानी घुस गया है। रास्ते भी बंद हो गए हैं। उधर, चिल्ला क्षेत्र में भी यमुना का कहर बढ़ता जा रहा है। खजुरी गांव का भी सड़क संपर्क टूट गया है।
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एसडीएम मंसूर अहमद और राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने इन गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा है। उधर, इन इलाकों में पांच दिनों से बिजली आपूर्ति बंद है। गांवों के स्कूल भी बंद हैं। हजारों बीघा खेत डूब जाने से उनमें बोई फसल चौपट हो गई है। चिल्ला और ललौली के बीच मुख्य सड़क (बांदा-बहराइच स्टेट हाईवे) में यमुना का पानी आ जाने से बांदा-कानपुर सड़क मार्ग बंद हो गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राजस्व कर्मियों के अलावा पुलिस भी तैनात कर दी गई है। नावों से सुरक्षित स्थान पर लोगों को भेजा जा रहा है। उधर, डीएम हीरा लाल और एसपी गणेश साहा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। नाव से भी जायजा लिया।
बरियारपुर और गंगऊ से डिस्चार्ज और बढ़ा
बांदा। मध्य प्रदेश की बारिश ने 24 घंटों के दौरान गंगऊ और बरियारपुर बांधों से केन नदी में डिस्चार्ज हो रहे पानी की मात्रा बढ़ा दी है। बुधवार को गंगऊ बांध से 67,209 क्यूसिक पानी केन नदी में गिरता रहा। मंगलवार से यह 40,808 क्यूसिक ज्यादा है। बरियारपुर से 49,117 क्यूसिक पानी केन नदी में डिस्चार्ज हो रहा है। इसमें 24 घंटे के दौरान 28,000 क्यूसिक की वृद्धि हुई है। ब्यूरो
बबेरू और कमासिन क्षेत्रों में कहर
बबेरू/कमासिन। यमुना और बागै नदी की बाढ़ से दर्जनभर गांवों को सड़क संपर्क टूट गया है। पानी से घिरे गांवों के ग्रामीणों को नावों से सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। तहसीलदार विपिन कुमार ने बाढ़ प्रभावित गांव दांदौ, खेरा, औदहा, अछरील, नरायनपुर, जोरावरपुर, लखनपुर, जगऊटोला, इटर्रा आदि गांवों का भ्रमण किया। ग्रामीणों को मदद का भरोसा दिलाया। बाढ़ से इन गांवों में लगभग दो हजार हेक्टेयर की फसल को नुकसान पहुंचा है। तहसीलदार ने नुकसान की जांच कराने को कहा।
सांसद ने सीएम को भेजी प्रभावित गांवों की सूची
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में केन, यमुना सहित कई नदियों से आई बाढ़ पर राज्यसभा सदस्य/सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हमीरपुर में यमुना और बेतवा की बाढ़ से प्रभावित तीन दर्जन गांवों की सूची दी है। कहा है कि यहां के सैकड़ों ग्रामीण बेघर खुले आसमान तले पड़े हैं।
कुछेछा महाविद्यालय में बनाए गए अस्थाई राहत शिविर में पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। सांसद ने अहेतुक सहायता, राशन, जानवरों के लिए भूसा-चारा, तिरपाल, चिकित्सा व्यवस्था और मच्छरों के बचाव की व्यवस्थाएं कराए जाने की मांग की है। बाढ़ से पूरी तरह क्षतिग्रस्त ग्रामों में कुछेछा, सूरजपुर, अमिरता, हेलापुर, टिकरौली, पारा ओझी, मेरापुर, रमेड़ी, भिलावा, केसरिया डेरा, कुतुबपुर, पटिया, जमरेही तीन, मनकी, भैदन, पत्योरा, बलिया आदि गांव बताए हैं।
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