बांदा। दहेज हत्या के दो अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों की जमानत अर्जियां मंगलवार को सेशन न्यायाधीश की अदालत से खारिज कर दीं गईं।
कोतवाली नगर क्षेत्र किरन कॉलेज, कटरा चौराहा के पास स्थित मकान में पति-पत्नी के बीच दहेज की मांग को लेकर आए दिन हो रहे विवाद में प्रियंका (20) ने जुलाई 2021 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना में मृतका के फौजी पिता आशाराम पाल (कालूकुआं, बांदा) ने 11 लोगों के विरुद्ध दहेज एक्ट में दर्ज कराई थी।
प्रियंका का विवाह 19 फरवरी 2019 को हुआ था। पुलिस ने विवेचना के बाद पति वीरेंद्र, सास, ससुर के खिलाफ चार्जशीट लगाई। आरोपी सास रामप्यारी व ससुर चंद्रपाल की जमानत अर्जी मंगलवार को दाखिल की गई। बहस के बाद सेशन न्यायाधीश गजेंद्र कुमार ने पर्याप्त आधार न पाते हुए खारिज कर दिया।
उधर, फतेहगंज थाना क्षेत्र के खेरिया गांव में 14 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आरोपी उत्तम की शादी लक्ष्मी (20) के साथ हुई थी। शादी के बाद 23 मई 2020 को लक्ष्मी ने दहेज उत्पीड़न से तंग आकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पिता ने दहेज एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पति उत्तम की ओर से मंगलवार को जमानत अर्जी सेशन न्यायाधीश की अदालत में पेश की गई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस और पत्रावली में मुहैया साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अर्जी खारिज कर दी। दोनों मामलों में अभियोजन की ओर से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह परिहार ने की।
फर्म मालिक के पुत्र की जमानत खारिज
बांदा। किसानों के खाते में गल्ले का मूल्य न भेजने के मामले में सेशन न्यायाधीश ने मंगलवार को फर्म मालिक के पुत्र की जमानत अर्जी खारिज कर दी। बबेरू थाने में 23 जून 2021 को किसान रामहित ने 9 किसानों का 521 बोरा (62 किलो) गल्ले का मूल्य 9,047,60 रुपये उनके खातों में अमित ट्रेडर्स की फर्म द्वारा न भेजे जाने पर फर्म के मालिक जयकरन पटेल (असवा तारापुर, थाना मलवां, फतेहपुर) व पुत्र अमित पटेल के खिलाफ दर्ज कराई थी।
जयकरन बबेरू मंडी समिति में गल्ला खरीद का कार्य करता है। 8 जुलाई से 2021 से अमित पटेल जेल में निरुद्ध है। मंगलवार को दोनों पक्षों के वकीलों की बहस और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद सेशन न्यायाधीश गजेंद्र कुमार ने पर्याप्त आधार न पाते हुए अमित पटेल की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह परिहार ने पैरवी की।