Administration took possession of 108 and 102 ambulances
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बांदा। मांगों पर अड़े एंबुलेंस चालकों और ईएमटी की हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। प्रशासन, पुलिस, परिवहन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने धरना स्थल पहुंचकर सभी 47 एंबुलेंस की चाबियां छीनकर अपने कब्जे में ले लीं। प्रशासन की सख्ती से कुछ चालक और ईएमटी काम पर लौट आए। एंबुलेंस सेवा बहाली के लिए परिवहन विभाग ने प्राइवेट चालक उपलब्ध करा दिए हैं। दावा किया गया है कि 20 से ज्यादा एंबुलेंस मरीजों को ढोने में लग गईं।
हड़ताल पर आमादा चालकों और ईएमटी ने 25 जुलाई की रात 12 बजे से सभी सरकारी एंबुलेंस का संचालन रोक दिया था। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर गरीब मरीजों पर पड़ा। परिजन किसी तरह रुपयों का जुगाड़ कर मरीजों को प्राइवेट एंबुलेंस से हायर सेंटर कानपुर व लखनऊ ले गए।
दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही समस्या और शासन की सख्ती पर बृहस्पतिवार को दोपहर सिटी मजिस्ट्रेट केशवनाथ, एसडीएम सदर सुधीर सिंह (आईएएस), डिप्टी कलेक्टर सुरभि शर्मा, सीओ सिटी राकेश कुमार सिंह, सीएमओ डा. वीके तिवारी, आरटीओ और एंबुलेंस सेवा डीपीएम उमेश द्विवेदी फोर्स के साथ धरना स्थल पहुंचे और हड़ताली एंबुलेंस कर्मियों को समझाने का प्रयास किया। न मानने पर उनसे एंबुलेंस की चाबियां छीन ली गईं।
इस दौरान आंदोलनकारी एंबुलेंस कर्मियों ने हंगामा भी किया, लेकिन प्रशासन की सख्ती के सामने उनकी एक न चली। सभी 108 व 102 एंबुलेंस अपने कब्जे में ले लीं और प्राइवेट चालकों की मदद से मेडिकल कॉलेज में लाकर खड़ी कर दी गईं। सीएमओ और डीपीएम (एंबुलेंस सेवा) ने बताया कि 22 एंबुलेंस का स्टाफ हड़ताल से वापस आ गया है। उन्होंने एंबुलेंस सेवा शुरू कर दी।
शेष 25 एंबुलेंस संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। परिवहन विभाग द्वारा प्राइवेट चालक उपलब्ध कराए गए हैं। उन्हें भी ड्यूटी आवंटित कर एंबुलेंस सौंपी जा रही है। उधर, एंबुलेंस सेवा संघ अध्यक्ष जयेंद्र सिंह के नेतृत्व में कर्मियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर मांग पत्र सौंपा। नई कंपनी द्वारा मानदेय में कटौती न करने और नए कर्मियों की भर्ती न करने की मांग की।