बांदा। केंद्र सरकार की ओर से संचालित जननी सुरक्षा योजना का प्रसूताओं को कोई लाभ नहीं मिल रहा। इस योजना में एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) की ओर से फरवरी माह से धेला नहीं दिया गया। नतीजे में प्रसव केंद्रों में 960 प्रसूताओं के आवेदन धूल फांक रहे हैं।
जननी सुरक्षा योजना की शुरूआत वर्ष 2005 में हुई थी। इसमें गरीब प्रसूताओं को आर्थिक राहत दिए जाने की व्यवस्था है। योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव बाद शहरी महिलाओं को एक हजार और ग्रामीण महिलाओं को 1400 रुपये दिए जाते हैं, लेकिन इन दिनों योजना कागजों तक ही सीमित रह गई। प्रसूता महिलाएं आर्थिक मदद के लिए नवजात को गोद में लिए अस्पतालों के चक्कर लगाती नजर आ रही हैं।
जिला महिला अस्पताल से मिले आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021-22 में 4980 प्रसूताओं में सिर्फ 4260 महिलाएं योजना से लाभान्वित हुईं। 720 प्रसूताओं को अभी योजना के लाभ का इंतजार है। इसी तरह वर्ष 2022-23 में 240 प्रसूता जननी सुरक्षा योजना का लाभ लेने के लिए लाइन में हैं। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक एक भी महिला को योजना से धेला नहीं मिला।
महिला अस्पताल सीएमएस डॉ. सुनीता सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष की कुछ महिलाओं के खाता संख्या और नामों में गड़बड़ियों से राशि नहीं पहुंच सकी। उन्हें दुरुस्त कराने के लिए अवगत कराया गया है।
फरवरी से नहीं मिला बजट
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एनएचएम के तहत जननी सुरक्षा योजना का बजट मिलता था। फरवरी से इस योजना में कोई बजट आवंटित नहीं हुआ। अबकी एनएचएम की ओर से सिर्फ वेतन का बजट दिया गया है। जननी सुरक्षा योजना में बजट जारी होने पर पात्र महिलाओं को योजना का लाभ दिया जाएगा।