बांदा। दैवी आपदा में फसलें बर्बाद होने पर क्लेम नहीं मिल पाता है। इससे चित्रकूटधाम मंडल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की रुचि घटती जा रही है। चालू फसली वर्ष में केवल 3,10,123 किसानों ने ही फसलों का बीमा कराया है। खरीफ फसल की औसत में रबी में बीमा कराने वाले किसानों की संख्या और घटी है। मंडल में 66 फीसदी किसानों ने इस बार फसल का बीमा नहीं कराया है।
राजस्व विभाग के आंकड़ों में मंडल में 9,08,423 किसान हैं। इसमें 282000 किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बने हैं। चालू फसली वर्ष में केवल 3,10,123 किसानों ने ही फसलों का बीमा कराया है। खरीफ में 1,64,345 किसानों ने फसलों का बीमा कराया था। रबी में बीमा कराने वाले किसानों की संख्या घट गई। 30 दिसंबर तक 1,45,778 किसानों ने ही रबी फसल का बीमा कराया है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों की दूरी बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के कारण होती जा रही है। दरअसल कंपनियों के प्रतिनिधि किसानों से संपर्क ही नहीं करते हैं। जिलों, ब्लॉकों में उनके कार्यालय तक किसानों को नहीं पता हैं। ज्यादातर प्रतिनिधि बैंकों से संपर्क कर केसीसी के आधार पर फसलों का बीमा कर देते हैं। खेतों का मुआयना तक नहीं किया जाता है।
दैवीय आपदा आने पर किसान बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों तक अपनी पीड़ा नहीं पहुंचा पाते हैं। जो किसान किसी तरह कंपनी प्रतिनिधियों तक पहुंच भी जाते हैं उन्हें नियमों के जाल में उलझाकर क्लेम से बाहर कर दिया जाता है। फसल को नुकसान के बाद भी बीमा से क्लेम न मिलने के कारण ज्यादातर किसान फसलों का बीमा नहीं करना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों को दो फीसदी प्रीमियम देना पड़ता है। शेष प्रीमियम राज्य व केंद्र सरकार देती हैं। बीमित किसान को बाढ़, आंधी, ओला, अतिवृष्टि, अग्निकांड आदि दैवी आपदाओं से फसलों को नुकसान होने पर बीमा क्लेम का दावा किया जाता है।
नहीं मिला था क्लेम : राजू
सदर तहसील के गंछा गांव के किसान राजू ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तो बेहतर है, लेकिन बीमा कंपनियों का रवैया ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में बीमा कराया था। बेमौसम बारिश से फसल खराब हो गई। बीमा कंपनी ने यह कहकर दावा खारिज कर दिया कि 80 फीसदी नुकसान पर ही क्लेम मिलेगा। कंपनी के इस रवैए के चलते अब फसल का बीमा नहीं कराते हैं।
बीमा कंपनी का कोई कार्यालय नहीं
बबेरू तहसील के परसौली गांव के किसान लाला का कहना है कि नुकसान होने पर अड़ंगेबाजी के चलते क्लेम नहीं मिलता। बीमा कंपनियां कोई न कोई बहाना लेकर दावा निरस्त कर देती हैं। बीमा कंपनी का यहां न कार्यालय है और न कोई अधिकारी बैठता है। ऐसे में शिकायत किससे करें?
मंडल में बीमा कराने वाले किसानों का ब्योरा
जनपद खरीफ रबी योग
बांदा 43396 41681 85077
चित्रकूट 17930 20353 38283
हमीरपुर 37297 39911 77208
महोबा 65722 43833 1,09,555
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योग 164345 145778 3,10,123
वर्जन-
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के फायदों से किसान सही से परिचित नहीं हैं। इसलिए बीमा कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। बीमा कराने में किसान से प्रीमियम केवल दो फीसदी लिया जाता है। शेष प्रीमियम राज्य व केंद्र सरकार जमा करतीं हैं। किसानों को योजना के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
- उमेश कटियार, संयुक्त कृषि निदेशक
वर्जन-
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए गांव-गांव में बैंक, कृषि विभाग की मदद से शिविर लगाए जाते हैं। किसान खुद के फायदे नहीं सोच पाते हैं, वह दूसरों के कहने पर चलते हैं।
- श्याम किशोर, जन संपर्क अधिकारी
एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी, बांदा