बांदा। मशहूर शायर अदम गोंडवी ने कहा कि, तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है। अन्ना पशुओं के लिए चर्चित चित्रकूटधाम मंडल का कुछ यही हाल है। मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा में अन्ना गायों के रखरखाव और संरक्षण को लेकर काफी खेल किया जा रहा है। सरकारी आंकड़े कुछ अलग बयानी कर रहे, जबकि हकीकत कुछ और है।
चित्रकूटधाम मंडल में लगभग 59 करोड़ रुपये का चारा-भूसा अन्ना गायें खा गईं, लेकिन अभी उनके पेट भरे नजर नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा मार्च 2019 से अब तक (28 माह) चित्रकूटधाम मंडल में भूख और प्यास के बीच गोशालाओं में करीब चार सैकड़ा गायों ने दम भी तोड़ दिया, लेकिन सरकारी फाइलों में गोशालाओं में रामराज्य ही बना हुआ है। आंकड़ों की बाजीगरी में पशुपालन विभाग का खूब कमाल है।
विभागीय फाइलों में सजे संवरे आंकड़े बता रहे कि चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों की 1049 गोशालाओं में 1,29,385 अन्ना पशु संरक्षित हैं। विभाग ने संरक्षित गायों में कुल 395 की मौत दर्शाई गई है। इसमें सबसे ज्यादा 195 गायें हमीरपुर में मरी हैं। बांदा में 126 गायों की मौत हुई, जबकि महोबा में 59 अन्ना पशु मृत बताए गए हैं। इसी तरह चित्रकूट में 15 गायों की मौत दर्शाई गई है। यह सभी आंकड़े मार्च 2019 से अब तक के बताए गए हैं।
28 माह में 57.92 करोड़ रुपये खत्म
पशुपालन विभाग के मुताबिक, पिछले 28 माह में चारों जनपदों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट की गोशालाओं में पशुओं के भरण-पोषण पर 58 करोड़ 92 लाख 37 हजार रुपये खर्च हुए हैं। बांदा जिले में 26 करोड़ सात लाख रुपये, चित्रकूट जिले में आठ करोड़ 94 लाख, महोबा जिले में 12 करोड़ 70 लाख और हमीरपुर 11 करोड़ 13 लाख रुपये खर्च बताया गया है।
प्रति पशु साढ़े पांच रुपये रोज खर्च
अन्ना पशुओं पर खर्च किए गए बजट के मुताबिक गोशालाओं में रोजाना प्रति पशु पर मात्र साढ़े पांच रुपये ही खर्च का औसत रहा है। प्रति माह का खर्च जोड़ा जाए तो 165 रुपये प्रति पशु खर्च दिखाया गया है। चित्रकूटधाम मंडल में 1,29,385 पशु गोशालाओं में संरक्षित हैं। 58 करोड़ 92 लाख खर्च हुआ है। यानि प्रति पशु पर 28 माह में 4634 रुपये खर्च बताया गया है।
लक्ष्य से कम हैं 86,685 अन्ना पशु
मंडल के चारों जनपदों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट के लिए गोशालाओं में संरक्षित होने वाले अन्ना पशुओं का लक्ष्य तय है। यह कुल दो लाख 16 हजार 70 पशु हैं, लेकिन गोशालाओं में सिर्फ 1,29,385 पशु ही संरक्षित हैं। यानि लक्ष्य से 86,685 पशु कम हैं।
मंडल में गोशालाओं के लिए अन्ना पशुओं का लक्ष्य---
बांदा-47,658
चित्रकूट-68,813
महोबा-61,765
हमीरपुर-37,834
योग 2,16,070
4226 पशुओं को नहीं लगा टैग
अन्ना पशुओं की ईयर टैगिंग (कान में टैग) के आदेश शासन ने दिए थे। चित्रकूटधाम मंडल में अब तक संरक्षित अन्ना पशुओं में 4226 पशुओं की ईयर टैगिंग नहीं हो पाई है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, 1,25,139 अन्ना पशुओं की टैगिंग की जा चुकी है, जबकि सभी गोशालाओं में संरक्षित पशुओं की संख्या 1,29,385 दर्शाई गई है।
38 हजार का बधियाकरण, 5246 का गर्भाधान
चित्रकूटधाम मंडल में अन्ना पशुओं की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने के लिए शासन ने बधियाकरण योजना लागू कर रखी है। इस बाबत पशुपालन विभाग का दावा है कि चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा में अब तक 38,284 अन्ना पशुओं का बधियाकरण कर दिया गया है। इसमें बांदा जिले में 11,986, चित्रकूट जिले में 8760, महोबा जिले में 10,467 और हमीरपुर जिले में 7071 पशुओं का बाधियाकरण किया गया है। इनके अलावा गोशालाओं में संरक्षित 5246 मादा गायों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। इसमें बांदा जिले में 685, चित्रकूट जिले में 2624, महोबा जिले में 1098 और हमीरपुर जिले में 839 मादा गायें शामिल हैं।
8615 अन्ना गायों को किया सुपुर्द
चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों बांदा, महोबा, हमीरपुर और चित्रकूट में 8615 अन्ना पशु लोगों को सुपुर्दगी में दिए जाने का दावा किया गया है। इसमें हमीरपुर में 3477, महोबा में 2447, बांदा में 561 और चित्रकूट में 2130 अन्ना गायें सुपुर्दगी में दी गईं हैं।
उम्रदराज पशुओं की मौत सामयिक
गोशालाओं में संरक्षित पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों की है। सूचना मिलने पर बीमार पशुओं का इलाज कराया जाता है। उम्रदराज पशुओं की मौत सामयिक है। शासन ने नोडल अधिकारी नामित किए हैं। वह गोशालाओं की जांच कर रहे हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
-मनोज अवस्थी, उपनिदेशक, पशुपालन चित्रकूटधाम मंडल
मंडल में गोशाला/कांजी हाउस की जनपदवार संख्या---
बांदा-231
चित्रकूट-294
हमीरपुर-333
महोबा-191
योग 1049
46 हजार अन्ना मवेशियों पर 450 गोशालाएं
उरई (जालौन)। लगभग 46 हजार अन्ना मवेशियों वाले जालौन जिले में तकरीबन 450 स्थायी और अस्थायी गोशालाएं हैं। उरई, कदौरा और रामपुरा आदि में कान्हा गोशालाएं भी संचालित हैं। इसके बाद भी मवेशियों का झुंड खेतों और हाईवे पर मंडराता दिखाई देता है। हर गोशाला में करीब दो से पांच कर्मचारी मवेशियों की देखरेख के लिए कार्यरत हैं। फिर भी मवेशियों का बुरा हाल है। अफसरों के मुताबिक, बीते साल गोशालाओं के रखरखाव के लिए एक करोड़ के आसपास का बजट मिला था, जबकि इस साल अभी तक बजट नहीं मिला है, जल्द ही आने की संभावना है। सरकारी आंकड़ों में एक साल के अंदर मवेशियों की मौतों की संख्या दो से चार के ही आसपास है, जो बीमारी के कारण हुई हैं। (संवाद)