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मलेरिया के 13 पॉजिटिव केस मिले

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बांदा। कोरोना की संभावित तीसरी लहर की तैयारियों में जुटे स्वास्थ्य विभाग को बारिश के मौसम में मलेरिया और मौसमी बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। मलेरिया रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। दो माह में मलेरिया के 13 पॉजिटिव केस सामने आए हैं। हालांकि, डेंगू का अब तक कोई पॉजिटिव केस नहीं मिला।
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पहले कोरोना ने पस्त किया और अब मच्छरजनित रोग डेंगू और मलेरिया के अलावा मौसमी बीमारियों का प्रकोप चल रहा है। मौसम में परिवर्तन से अधिकांश घरों में सर्दी, खांसी और बुखार के मरीज मिल रहे हैं।
मलेरिया और डेंगू के लिए अलर्ट जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने नगर क्षेत्र में तीन और जिले के सभी आठों ब्लाक में दो-दो टीमें लगाई गई हैं। मलेरिया संदिग्ध मरीज की जानकारी पर टीमें स्लाइड बना रही हैं।
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मलेरिया विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई माह में 1975 संदिग्धों के नमूने लिए गए। इनमें मात्र पांच मलेरिया पॉजिटिव केस सामने आए। इसी तरह अगस्त माह में 2136 मलेरिया संदिग्धों की स्लाइड बनाई गई। आठ पॉजिटिव केस मिले।
विभाग का दावा है कि इनके घरों में टीमों ने लार्वा निरोधक दवा का छिड़काव किया है। इस बाबत एसीएमओ डा. शिशिर पुरी और जिला मलेरिया अधिकारी लाल साहब सिंह ने बताया कि डेंगू के अलर्ट को लेकर तैयारियां पूरी हैं।
फिलहाल अब तक कोई केस सामने नहीं आया है। सभी सीएचसी और पीएचसी में लार्वा निरोधक दवा छिड़काव के लिए उपलब्ध कराई गई है।
मौसमी बीमारियों ने मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में ओपीडी मरीजों की संख्या बढ़ा दी। पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों के मुताबिक, जिला अस्पताल में एक हजार और मेडिकल कॉलेज में 700 से ज्यादा मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
इनमें अधिकांश मौसमी बीमारी जैसे सर्दी, खांसी, बुखार आदि से ग्रसित हैं। अस्पतालों के फिजीशियन के कक्षों में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। वार्डों के बेड भी फुल हैं। कमोवेश यही स्थिति निजी अस्पतालों की है।
एक सप्ताह में ओपीडी में आए मरीजों का ब्योरा---
तारीख जिला अस्पताल मेडिकल कालेज
26 अगस्त 1092 638
27 अगस्त 1142 763
28 अगस्त 946 752
30 अगस्त 630 539
31 अगस्त 1262 924
01 सितंबर 1320 927
02 सितंबर 1182 819
मलेरिया/डेंगू बुखार के लक्षण : जाड़ा देकर तेज बुखार, मांसपेशियों, जोड़ों व शरीर में दर्द, जी मिचलाना, सिर दर्द, घबराहट, त्वचा में लाल चकत्ते, दाने, मुंह, नाक व मसूड़ों से खून, चक्कर आना आदि।
बचाव के उपाय : आसपास सफाई रखें। पानी को इकट्ठा न होने दें। मच्छरों के डंक से बचें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। मच्छरदानी का उपयोग करें। प्रारंभिक लक्षण दिखने पर अनदेखा न करें।
तुरंत डाक्टर से इलाज कराएं। कूलर, गमला, बर्तनों आदि में पानी नियमित रूप से बदलें। जलभराव वाले स्थान में मिट्टी तेल, डीजल या जला मोबिल ऑयल डालें। नीम की पत्ती का धुआं करें आदि।
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