बलरामपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैसड़ी में संस्थागत प्रसव की खराब प्रगति पर सीएमओ ने नाराजगी जताई है। संस्थागत प्रसव की प्रगति में सुधार लाने का निर्देश अधीक्षक को दिया गया है। स्थिति में सुधार न होने पर वेतन रोकने की चेतावनी दी गई है। लापरवाह आशा व एएनएम के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार ने शुक्रवार की शाम सीएचसी गैसड़ी पहुंचकर संस्थागत प्रसव के प्रगति की समीक्षा की। आबादी के हिसाब से सीएचसी क्षेत्र में प्रतिमाह 500 से 600 तक प्रसव होनी चाहिए, लेकिन यहां मात्र 350 से 400 तक संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। रजिट्रेशन के सापेक्ष प्रतिमाह करीब 200 प्रसव कम होना पाया गया। सीएमओ ने बताया कि संस्थागत प्रसव के लिए प्रत्येक गांव में आशा द्वारा गर्भवती की पहचान की जाती है। आशा की सूचना के आधार पर संबंधित एएनएम द्वारा गर्भवती का रजिट्रेशन के साथ ही जरूरी टीकाकरण व जांच करानी होती है।
आशा और एएनएम की लापरवाही के चलते तमाम गर्भवती संस्थागत प्रसव के बजाए प्राइवेट अस्पतालों में अप्रशिक्षित कर्मियों से प्रसव कराती हैं। सीएचसी में संस्थागत प्रसव की प्रगति क्यों खराब हैं पूछताछ तो बताया गया कि कई स्थानों पर आशा की जगह उनके पति काम देखते हैं। इसके चलते गर्भवती अपने आप को असहज महसूस करती हैं। सीएमओ ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सीएचसी अधीक्षक वीरेंद्र आर्या को ऐसे आशा के खिलाफ कठोर कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने अधीक्षक को संस्थागत प्रसव की प्रगति में सुधार लाने का निर्देश देते हुए चेतावनी दिया कि यदि स्थिति में सुधार न हुआ तो वेतन रोक दिया जाएगा। उन्होंने संस्थागत प्रसव के प्रति लापरवाह आशा व एएनएम के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश भी दिया है।