बलरामपुर। गांवों में सांस्कृतिक धरोहरों की तलाश करने का एक मई से अभियान चलाया जाएगा। जिले के 800 ग्राम पंचायतों में अभियान को सफल बनाने की सभी तैयारियां की जा रही हैं। सदर तहसील सभागार में शुक्रवार को कॉमन सर्विस सेंटरों के संचालकों की बैठक कर अभियान को सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई है। सेंटर के कर्मचारियों की ओर से मोबाइल पर सांस्कृतिक धरोहरों के अभिलेख जुटाकर संरक्षित किए जाएंगे और शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। डीएम श्रुति ने कॉमन सर्विस सेंटर के संचालकों को शत-प्रतिशत सांस्कृतिक धरोहरों के अभिलेख जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
कॉमन सर्विस सेंटर के जिला प्रबंधक अमित सिंह ने बैठक में कहा कि 30 जून तक चलने वाले इस अभियान में जिले के सभी 800 ग्राम पंचायतों में सांस्कृतिक धरोहर की तलाश की जाएगी। गांव की सांस्कृतिक धरोहर को मोबाइल में कैद किया जाएगा। भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय व सीएससी के मध्य गांवों में धरोहार की तलाश करने के लिए अनुबंध किया गया है। सभी गांवों की सांस्कृतिक सूचना विशेष मोबाइल एप के माध्यम से संकलित करने का काम कॉमन सर्विस सेंटर के संचालकों के माध्यम से होगा। ग्राम पंचायत स्तर के 800 सीएससी उद्यमियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। गांवों की सांस्कृतिक धरोहर को तलाश करने का काम देश में पहली बार शुरू किया गया है। इसे मेरा गांव, मेरी धरोहर नाम दिया गया है।
सर्वे के दौरान सीएससी उद्यमियों को गांव के खास सांस्कृतिक पहचान को मोबाइल में कैद करना है। सभी गांव के प्रसिद्ध स्थान, किवदंती, व्यक्ति विशेष, पकवान, विशेष कपड़े व आभूषण आदि की जानकारी मोबाइल में ली जाएगी। कॉमन सर्विस सेंटर के उद्यमियों को अपने-अपने ग्राम पंचायत में सांस्कृतिक धरोहर की तलाश करनी है। कॉमन सिर्वस सेंटर के जिला समन्वयक अरुण प्रकाश वर्मा ने सभी उद्यमियों को सांस्कृतिक धरोहर की तलाश करने के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बैठक में जिले के सभी कॉमन सर्विस सेंटर के संचालक आदि मौजूद रहे।