बलरामपुर। जिला महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण बीते चार माह से अल्ट्रासाउंड जांच का कार्य ठप पड़ा है। अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला बंद होने से जांच के लिए मौजूद मशीन धूल खा रही है। जांच के लिए हर दिन अस्पताल आने वाले मरीजों व गर्भवतियों को निजी केंद्रों पर जा कर महंगी जांच कराने की परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
संसाधनों की कमी के कारण जिला महिला अस्पताल में आने वाली महिलाओं व गर्भवतियों को इलाज की उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यहां प्रतिदिन 200 से अधिक महिलाओं की ओपीडी होती है। इनमें से 25 से अधिक महिलाओं को चिकित्सक अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखते हैं। चार माह पूर्व महिला अस्पताल में संबद्ध रेडियोलॉजिस्ट डॉ. शारदा रंजन को पदोन्नति देकर जिला मेमोरियल अस्पताल का सीएमएस बना दिया गया था। इसके बाद से किसी भी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती अस्पताल में न होने से अल्ट्रासाउंड जांच का कार्य बंद पड़ा है। ऐसे में गंभीर बीमारी व गर्भवतियों को जांच के लिए दूर दराज स्थित निजी केंद्रों पर जा कर महंगी जांच कराना पड़ रही है।
बुधवार को अस्पताल आए मोहम्मद अकरम ने बताया कि उनकी पत्नी रूखसार को पेट में दर्द होने की शिकायत पर डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच कराने को कहा। अस्पताल में जांच की सुविधा न होने पर बाहर जांच कराने में 600 रुपये खर्च करना पड़े। इसी तरह गैसड़ी से गर्भवती बेटी को दिखाई आई रामावती ने बताया कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद होने के कारण आशा उन्हें एक निजी केंद्र पर ले गई, जहां 650 रुपये में अल्ट्रसाउंड जांच काना पड़ी। जबकि कमला ने महंगी होने के कारण जांच ही नहीं कराई।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. विनीता राय ने बताया कि अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट की तैनाती न होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। रेडियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। भरोसा दिलाया कि जल्द ही जांच कार्य शुरू हो जाने से मरीजों को राहत मिलेगी।