बलरामपुर। दुराचार के आरोपी व उसके एक महिला सहयोगी को दोषी मानते हुए एफटीसी प्रथम ने 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपियों को 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी अदा करने का आदेश दिया है।
अधिवक्ता रणधीर सिंह ने बताया कि थाना तुलसीपुर में एक व्यक्ति ने प्रार्थना पत्र दिया था कि उसकी नतिनी खेत में घास काटने गई थी।
वापस लौटते समय शराफत नामक व्यक्ति एक महिला मैनाज के सहयोग से उसे भगा ले गया। पुलिस मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। पीड़िता को बरामद कर उसका बयान व डाक्टरी परीक्षण कराया गया।
पीड़िता के बयान के आधार पर शराफत के विरुद्घ दुराचार के आरोप की बढ़ोत्तरी करते हुए शराफत व मैना उर्फ मैनाज के विरुद्घ पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने सात गवाहों को न्यायालय पर प्रस्तुत किया।
शराफत व मैना के वकील ने फर्जी फंसाए जाने की दलील न्यायालय पर रखी। सरकारी अधिवक्ता ने न्यायालय से अधिकतम सजा दिए जाने का अनुरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद एफटीसी प्रथम विनोद कुमार पंचम ने शराफत को दुराचार व बहला फुसलाकर भगा ले जाने तथा मैना को भगाने में सहयोग करने का दोषी मानते हुए 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर 14-14 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।