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पांच डाक्टरों पर है साढ़े चार लाख बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी

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बलरामपुर। जिले में बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टरों की भारी कमी है। छह बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टरों पर जिले के साढ़े चार लाख बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए जिले में पांच पीकू वार्ड बनाए गए हैं जिनमें से तीन पीकू वार्डो में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। यदि तीसरी लहर आई तो इन पीकू वार्ड में बच्चों का इलाज कैसे होगा इसका जवाब विभागीय उच्चाधिकारियों के पास भी नहीं है।
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जिले में तीन जिला अस्पताल व नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ सैकड़ो प्राथमिक व उप स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। तीन जिला अस्पतालों के साथ मात्र एक सीएचसी में ही बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है।
संयुक्त जिला अस्पताल में डॉ. नितिन चौधरी व डा. सौरभ कुमार, जिला मेमोरियल चिकित्सालय में डॉ. राजेश कुमार, जिला महिला अस्पताल में डॉ. महेश वर्मा व डॉ. एससी गुप्ता तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुलसीपुर में डॉ. अशोक कुमार बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं।
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इनमे से डॉ. महेश वर्मा को महिला अस्पताल में एसएनसीयू (सिक न्यूबॉर्न केयर युनिट) का प्रभारी बनाया गया है। एसएनसीयू वार्ड हमेशा बीमार नवजात शिशुओं से भरा रहता है जिसके कारण डा. महेश वर्मा पर अधिक भार रहता है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की संभावना को देखते हुुए सरकार उनके इलाज की बेहतर व्यवस्था पर विशेष फोकस कर रही है।
कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए जिले के पांच अस्पतालों में पीकू वार्ड बनाया गया है। जिला संयुक्त अस्पताल में 40 बेड तथा सीएचसी श्रीदत्तगंज, सीएचसी नंदनगर, सीएचसी उतरौला एवं सीएचसी तुलसीपुर में 20-20 बेड का पीकूू वार्ड पूरी तरह से तैयार है।
पीकू वार्डों को भले ही ऑक्सीजन सहित अन्य संसाधनों से लैस किया गया है लेकिन सीएचसी नंदनगर, सीएचसी श्रीदत्तगंज एवं सीएचसी उतरौला में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नही है। इन अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से यहां के पीकू वार्ड में कोरोना संक्रमित बच्चों का इलाज कैसे होगा यह समझ से परे है।
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