देहात (बलरामपुर)। राप्ती नदी व पहाड़ी नालों के बाढ़ के चलते लोगों को भारी तबाही झेलनी पड़ी है। खतरे के निशान अभी भी राप्ती नदी का जलस्तर 12 सेंटीमीटर ऊपर है। तटवर्ती इलाकों में बसे लोगों को राप्ती के बाढ़ के कहर से जूझना पड़ रहा है। पहाड़ी नाले के सड़क कटान को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर विरोध जताया। डीएम को ज्ञापन भेजकर समस्या का निराकरण कराने की मांग की।
सदर ब्लॉक के सद्दोपुर डबकी का संपर्क मार्ग चक्कवा पहाड़ी नाले में कट गया है जिससे सद्दोपुर, कोड़री, डबकी व बौडीह सहित कई गांव के लोगों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। मार्ग से सिर्फ पैदल आने-जाने का रास्ता बचा है। जिला मुख्यालय व गांव से बाहर निकलने का यही एक मात्र रास्ता है जिसे पहाड़ी नाले ने काट दिया है।
क्षेत्रवासी मिंदर, चिनकऊ, जगदंबा, राम संवारे, उजागर, नरेश, मुन्नू, बराती व प्रताप आदि ने डीएम को ज्ञापन भेजकर तत्काल समस्या का निराकरण कराने की मांग की है। शीघ्र समस्या का निराकरण न होने पर ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी है। राप्ती नदी के बाढ़ का पानी भी बहुत धीरे-धीरे घट रहा है।
गुरुवार को शाम चार बजे तक राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.62 मीटर की तुलना में 104.74 मीटर रिकार्ड किया गया जो 12 सेंटीमीटर ऊपर है। सदर, उतरौला व तुलसीपुर तहसील के करीब 100 गांवों में अभी भी राप्ती नदी के बाढ़ का पानी भरा हुआ है जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित पीड़ितों ने शासन-प्रशासन से संसाधन मुहैया कराने की मांग की है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार शुक्ल ने बताया कि सदर ब्लॉक के सद्दोपुर डबकी संपर्क मार्ग का पहाड़ी नाले के काट लिए जाने की शिकायत मिली है जिसे बाढ़ खंड के अधिकारियों को तत्काल दुरुस्त कराने का निर्देश दिया गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राजस्व निरीक्षकों व लेखपालों की टीमें निगरानी कर रही है।