बलरामपुर। दहेज हत्या के आरोपी पति को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला जज ने आरोपी को बीस हजार रुपये अदा करने का आदेश दिया है। वादी मुकदमा व गवाहों के मुकरने के बाद भी आरोपी पति अपने को निर्दोष साबित करने में विफल रहा।
यह जानकारी देते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कुलदीप सिंह ने बताया कि निजामुददीन ने तुलसीपुर थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था कि उसकी बेटी शायरा का निकाह भोला उर्फ सलीम से छह साल पहले हुआ था। दहेज के लिए सलीम बेटी शायरा को मारता-पीटता था।
पांच मार्च 2019 को भोला ने शायरा को गला दबाकर मार डाला। पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत कर सलीम को जेल भेज दिया। पुलिस ने विवेचना के बाद प्रथम दृष्टया दहेज हत्या का दोषी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
सत्र परीक्षण के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने पांच गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया लेकिन वादी मुकदमा सहित उनके परिवार के लोगों ने न्यायालय में अपना बयान देते समय सलीम द्वारा दहेज मांगने व हत्या किए जाने का दोषी नहीं माना। सरकारी गवाहों ने आरोप पत्र का समर्थन किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शायरा की गला दबाकर हत्या होने की पुष्टि हुई थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने सलीम को निर्दोष मानते हुए अपना पक्ष रखा कि घर में चोर आ गए थे और चोरों ने शायरा को मार डाला।
सरकारी अधिवक्ता ने शायरा की हत्या में सलीम को ही दोषी साबित करते हुए कठोर सजा दिए जाने की अपील की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र बहादुर यादव ने सलीम को शायरा की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।