हरैया सतघरवा (बलरामपुर)। खेतों की सिंचाई के लिए बनाए गए जलाशय सूखे पड़े हैं। ऐसे में क्षेत्र के करीब डेढ़ सौ गांवों के दो लाख किसानों के समक्ष सिंचाई का संकट बना हुआ है। किसानों ने डीएम को एक पत्र भेजकर जलाशय की सिल्ट सफाई का कार्य प्राथमिकता पर कराए जाने की मांग की है।
वर्ष 1955-56 में सिंचाई विभाग की तरफ से खैरमान जलाशय का निर्माण कराया गया था। परंतु सिल्ट सफाई न होने से के कारण जलाशय में ज्यादा पानी एकत्रित नहीं हो पा रहा है। पर्याप्त पानी न हो पाने के कारण यह टेल तक नहीं पहुंच पाता, इससे किसानों को सिंचाई कार्य में काफी परेशानी उठाना पड़ रही है।
क्षेत्रीय किसान रामेश्वर प्रसाद शुक्ल, नानकून, सियाराम, अलखराम, बाबूराम, रामदुलारे, लल्लन खान, चांद अली तथा सुखराम आदि ने बताया कि खैरमान जलाशय के सिल्ट की सफाई कभी नहीं कराई गई है। सिंचाई विभाग प्रतिवर्ष नहर की सफाई करके अपने कार्यों को पूरा मान लेता है। विभागीय स्तर पर केवल ट्रैक्टर रोटावेटर से नहर की जुताई कर लाखों का बजट खपा दिया जाता है। देखभाल न होने से जलाशय नरकुटवा फीडर के पास से कटा है। इससे भी जलाशय का पानी हिंगहा नाला में बह जाता है।
इस जलाशय से महादेव बांकी, फजलहवा, टेंगनवार, खवासपुरवा,सोनपुर, सहिजना भुलभुलिया, फकीरीडीह, उदईपुर मजगवां गनवरिया, भगता, सिरहिया सिकंदरबोझी, लखनीपुर, शंकर नगर व भितवारियाकला सहित 150 गांव के किसानों के समक्ष सिंचाई का संकट बना हुआ है।
सिंचाई के लिए जलाशय से पर्याप्त पानी न मिल पाने व आए दिन बिजली की आवाजाही के कारण इलाके में सिंचाई के लिए डीजल चलित पंपों का सहारा लेना पड़ रहा है। जो पैदावार की लागत को बढ़ा रहा है।