बलरामपुर। कहते हैं कि परदेस से अच्छा अपना गांव व देश होता है। ये बात आज दूसरे प्रदेशों से लौट रहे हजारों कामगारों व उनके परिवारीजनों की जुबान कहते नहीं थक रही है। ये लोग चार दिनों तक ट्रक में जोखिम भरी यात्रा कर इस संकटकाल में अपने घरों को वापस लौटकर आ रहे हैं। जिले की सीमा पर पहुंचते ही ये सभी खुशी से चहक उठे।
गोंडा रोड पर कुआना रेंज के पास बने बैरियर का नजारा रविवार सुबह देखने लायक था। यहां दूरदराज से आए स्थानीय कामगार अपने परिवार के साथ कतारबद्ध होकर मेडिकल चेकअप करा रहे थे। इस दौरान इनकी आंखों में गजब का सुकूून दिख रहा था। यात्रा का वृतांत पूछने पर रमेश, सुरेश, रामनाथ, रेखा, प्रभावती, साधना आदि ने बताया कि रोजगार के लिए वे लोग महाराष्ट्र के कल्याण में परिवार सहित रहते थे।
कोरोना के बीच हुए लॉकडाउन ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। लॉकडाउन के बाद रोजगार छिन गया। पास में बचत के रूप में रखी थोड़ी बहुत रकम तेजी से खर्च हो रही थी। देखते ही देखते भूखों मरने की नौबत आने लगी थी। घर वापसी का कोई आसार नजर नहीं आ रहा था। रोजगार दाताओं ने भी मुंह मोड़ लिया था। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रवासी कामगारों को वापस बुलाने का फरमान जारी किया तो इन लोगों ने ट्रेन व बसों के बजाए खुद ही पैसे खर्च कर डीसीएम ट्रक बुक करा लिया।
चार दिन की लंबी यात्रा में स्त्री, पुरुष व बच्चों ने साहस दिखाया। रास्ते में कुछ मिल गया तो खा-पी लिया नहीं तो भूखे ही चलते रहे। डीसीएम में ठीक से बैठने की भी व्यवस्था नहीं थी। रविवार सुबह ये लोग जिले की सीमा पर पहुंचते ही खुशी से उछल पड़े। इनका कहना था कि संकट की इस घड़ी में परदेस से लाख गुना अच्छा अपना गांव है। प्रशासन ने इन सभी लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण के बाद इनके गांव से नजदीक के क्वारंटीन सेंटर पर क्वारंटीन कर दिया है। पूरी जांच पड़ताल व क्वारंटीन अवधि पूर्ण करने के बाद ये लोग अपने-अपने घर के लिए प्रस्थान करेंगे।