बलरामपुर। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के मकसद से बीते दिन जिले के 20 अस्पतालों में सुरक्षित मातृत्व दिवस का शुभारंभ हुआ। सुरक्षित मातृत्व दिवस पर कुछ अस्पतालों में तमाम अव्यवस्थाएं मिलीं। अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के बैठने तक की व्यवस्था नहीं की गई थी। तमाम महिलाएं फर्श पर ही बैठी मिलीं। गर्भवती महिलाओं को बाहर से दवाएं भी लिखी गई हैं। सभी अस्पतालों में कुल 1560 गर्भवती महिलाओं के सेहत की जांच की गई है।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार की तरफ से प्रत्येक माह के 9 तारीख को सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन किया जाता है। जिले के 20 अस्पतालों में सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन किया गया। संयुक्त जिला अस्पताल में इस अभियान को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह दिखा। सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार व क्वालिटी मैनेजर डॉ. रुचि पांडेय ने अभियान शुुरू कराया। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शक्ति श्रीवास्तव ने गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें निशुल्क दवाएं दीं। जिला महिला अस्पताल में 45 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें से 6 महिलाएं कुपोषित पाई गईं।
सीएचसी श्रीदत्तगंज में 126 तथा पीएचसी महदेइया में 76 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। अधीक्षक डॉ. विकल्प मिश्रा ने बताया कि 25 महिलाओं में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) पाई गई। एचआरपी वाली महिलाओं को आवश्यक दवाएं दी गई हैं और समय-समय पर जांच कराने को कहा गया है। सीएचसी गैसड़ी, पचपेड़वा, शिवपुरा, उतरौला, सादुल्लाहनगर व गैड़ास बुजुर्ग आदि में सुरक्षित मातृत्व दिवस पर अव्यवस्था देखने को मिली। इन स्थानों पर न तो कोविड प्रोटोकॉल का पालन हुआ और न गर्भवती महिलाओं के लिए भोजन आदि की व्यवस्था ही की गई। जांच कराने आई गर्भवती महिला प्रेमावती, निर्मला, किताबुन्निशा व सलमा आदि ने बताया कि उन्हें बाहर से जांच कराने का सुझाव देने के साथ-साथ बाहर की दवा भी लिखी गई है।