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Balrampur News: खरझार नाले की मार से 15 गांव के किसान परेशान

Tue, 23 Jun 2026 11:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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फोटो-23-बलरामपुर के महराजगंज तराई में खरझार नाले में कटी सड़क ।-फाइल फोटो
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महराजगंज तराई । बरसात का मौसम नजदीक आते ही खरझार पहाड़ी नाले के किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। पिछले वर्ष आई बाढ़ में नाले के तेज बहाव से सड़क कटकर पूरी तरह खरझार नाले में समा गई थी। एक वर्ष बीतने के बाद भी सड़क का पुनर्निर्माण नहीं हो सका है, जिससे ग्रामीणों को आज भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सड़क कट जाने के कारण चिकनौटा, बरगदही, सुखदेवपुरवा, हिम्मतपुरवा, चंदनजोत, साखीरेत, कौवा और किठुरा समेत कई गांवों के लोगों को आवागमन के लिए लगभग सात किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीण बेला गांव होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। इससे मरीजों, छात्रों और दैनिक कामकाज के लिए आने-जाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।-संवाद



बाढ़ में प्रभावित हो जाते हैं 15 गांव



खरझार पहाड़ी नाले में बाढ़ आने पर रामगढ़ मैटहवा, विजयीडीह, सुगानगर, औरहिया, लहेरी, रूपनगर, जगरामपुरवा, शांतिपुरवा समेत करीब 15 गांव प्रभावित हो जाते हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट जाता है और लोगों को जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय और बाजार तक पहुंचना चुनौती बन जाता है। कई बार मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता, जबकि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
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हजारों बीघा खेतों में भर जाती है बालू



ग्रामीण सूर्यलाल विश्वकर्मा, तुलाराम, कुन्ने, राजेंद्र वर्मा, अमित सिंह और मंगलदेव यादव ने बताया कि पहाड़ी नाले की बाढ़ अपने साथ बड़ी मात्रा में बालू भी लेकर आती है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद क्षेत्र के हजारों बीघा खेतों में रेत की मोटी परत जम जाती है। किसानों का कहना है कि उपजाऊ भूमि पर बालू जम जाने से खेती करना मुश्किल हो जाता है। कई खेत वर्षों तक बंजर जैसे हो जाते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। हर साल फसलें नष्ट होने से किसानों की आजीविका पर संकट गहरा जाता है।



स्थायी समाधान की मांग



ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ आने के बाद राहत और बचाव की चर्चा होती है, लेकिन सड़क, कटान और खेतों में बालू भरने जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाता। लोगों ने प्रशासन से टूटी सड़क का शीघ्र पुनर्निर्माण कराने, बाढ़ से प्रभावित गांवों के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने और किसानों को राहत दिलाने की मांग की है।



2.46 करोड़ की लागत से बन रहे तटबंध का 90 फीसदी कार्य पूरा



हरैया सतघरवा। राप्ती नदी के तटवर्ती गांवों को बाढ़ और कटान से बचाने के लिए करमहना-भोजपुर तटबंध को सुदृढ़ करने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब 2.46 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे इस कार्य का 90 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के दौरान राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ और कटान का खतरा बना रहता है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरत राम ने बताया कि करमहना-भोजपुर तटबंध के सुदृढ़ीकरण का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य भी तेजी से कराया जा रहा है।

फोटो-23-बलरामपुर के महराजगंज तराई में खरझार नाले में कटी सड़क ।-फाइल फोटो

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