बलरामपुर। कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए जहां सरकार शत-प्रतिशत टीकाकरण पर जोर दे रही है वहीं कुछ लोग टीका लगवाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। अशिक्षा व गलतफहमी के चलते नेपाल सीमा से सटे तथा तराई क्षेत्र केे कुछ गांवों में समझाने के बावजूद लोग टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। तीस नवंबर तक शत-प्रतिशत लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। आशा व एएनएम घर-घर जाकर टीका लगवाने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही हैं।
बताते चलें कि कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए टीकाकरण को प्रमुख हथियार माना जा रहा है। बलरामपुर जनपद में 15 लाख 72 हजार 506 लोगों को कोविड वैक्सीन दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित है। शासन के निर्देशानुसार तीस नवंबर तक इन सभी लोगों को वैक्सीन की पहली डोज हरहाल में दी जानी है।
प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद जिले में टीकाकरण की गति रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। अभी तक जिले में केवल 10 लाख 47 हजार 740 लोगों ने ही वैक्सीन की पहली डोज ली है।
इस तरह 524766 लोगों ने अभी तक वैक्सीन की पहली डोज भी नही ली है। सबसे खराब स्थिति नेेपाल सीमा से सटे गांवों के साथ तराई क्षेत्र के गांवों की है। तराई क्षेत्र के तमाम गांवों में अशिक्षा व गलतफहमी के चलते लोग टीका लगवाने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
बीते माह सीएचसी शिवपुरा क्षेत्र के कुछ गांवों में टीकाकरण करने गई स्वास्थ्य विभाग की टीम को ग्रामीणों का विरोध भी झेलना पड़ा था। कुछ गांवों में अभी भी लोग टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार लोगों को टीकाकरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं। आशा व एएनएम घर-घर जाकर लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि कोरोना की तीसरी लहर आई तो टीका न लगवाने वाले लोगों को नुकसान पहुंच सकता है।