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राप्ती नदी के कटान से किसानों के परिवार को भुखमरी का संकट

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बलरामपुर। राप्ती नदी की कटान से किसानों के परिवार को भुखमरी का संकट सताने लगा है। सदर व उतरौला तहसील के डेढ़ दर्जन गांवों में राप्ती नदी कटान करके कहर बरपा रही है। किसानों ने शासन प्रशासन से इस संकट से निजात दिलाने और राप्ती नदी में समाई जमीनों का मुआवजा दिलाए जाने की गुहार लगाई है। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से अब तक महज आंकलन ही कराया गया है। शासन प्रशासन से मदद न मिलने से किसानों में भारी आक्रोश है।
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सदर व उतरौला तहसील में राप्ती नदी के तटीय इलाकों में बसे चौकाकला, लालपुर फगुईया, गोसाईपुरवा, पाठकपुरवा, गुलामपुरवा, बेलहा, चरनगहिया, रामपुर, बौड़िहार, कुडऊ व घोसियारपुर सहित डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में कटान का मंजर है। सदर तहसील के लालपुर फगुईया व उसके मजरा गोसाईपुरवा निवासी वंशीलाल, राम करन, ननके, राम बरन, पाटेश्वरी, दूधनाथ, शेषराम, फौजदार, रवि प्रताप, मेवाराम, अयोध्या प्रसाद, सहदेव, कृष्ण कुमार, मिश्रीलाल व अलखराम आदि ने बताया कि उनके घरों को राप्ती नदी ने काटकर उन्हें पहले से ही बेघर कर दिया है। सैकड़ों बीघे जमीन भी राप्ती नदी में विलीन हो चुकी है।
राप्ती नदी की कटान से आर्थिक नुकसान उठाने वाले सभी पीड़ितों ने शासन प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। सदर तहसील के ग्राम पंचायत मिर्जापुर व बेलहा गांव के पास भी राप्ती नदी की कटान जारी है। रामपुर घोसियार व भचकहिया के तटबंध को भी राप्ती नदी के कटान की जद में बताया जा रहा है। लोगों ने डीएम से तटबंध को राप्ती नदी की कटान से बचाने की मांग की है, जिससे गांव राप्ती नदी की कटान से प्रभावित न हों। एडीएम वित्त एवं राजस्व व जिला आपदा प्रभारी अरुण कुमार शुक्ल ने बताया कि जिले के दोनों तहसीलों में राप्ती नदी की कटान प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व कर्मियों को तैनात किया गया है। एसडीएम को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कटान पीड़ितों को शीघ्र ही शासन स्तर से मदद मुहैया कराई जाएगी।
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