बलरामपुर। सभी राजनीति दल मंच पर भले ही महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने की बात करते हों लेकिन हकीकत इससे जुदा है। इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़ किसी भी अन्य दल ने आधी आबादी पर भरोसा नहीं जताया है। जिला बनने के बाद वर्ष 2002 में सदर सीट से सपा की महिला प्रत्याशी गीता सिंह विधायक बनीं थीं।
बलरामपुर जिले का सृजन 22 मई 1997 को हुआ था। जिला बनने के बाद यह पांचवां विधानसभा चुनाव है। वर्ष 2002 में सपा ने बलरामपुर सदर सीट से पूर्व डीजीपी की पत्नी गीता सिंह को टिकट दिया और वह विधायक भी बनी थीं। इसके अलावा अन्य किसी भी दल ने महिलाओं को न तो टिकट दिया और न ही अन्य किसी महिला को विधायक बनने का गौरव हासिल हुआ। वहीं दूसरी तरफ जिला बनने के बाद से आज तक जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर महिलाओं का लगातार कब्जा है। जिले की नगर पालिका बलरामपुर तथा दो नगर पंचायत तुलसीपुर व पचपेड़वा में महिला ही अध्यक्ष है। ऐसा नहीं है कि महिलाएं टिकट की दावेदारी नहीं करतीं, दरअसल पार्टियां उन पर भरोसा नहीं करतीं। आसन्न विधानसभा चुनाव में केवल कांग्रेस ने बलरामपुर सदर सुरक्षित सीट से महिला बबिता आर्य को चुनाव मैदान में उतारा है।
भाजपा, सपा व बसपा ने किसी भी सीट से महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारी। उतरौला विधानसभा सीट से पूर्व एमएलसी सविता सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में है। यहीं से इनके पति धीरेंद्र प्रताप सिंह धीरू भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।