ललिया/गैड़ास बुजुर्ग/महराजगंज तराई (बलरामपुर)। राप्ती नदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। बाढ़ का पानी उतरते ही नदी के किनारों पर कटान तेज हो गया है। किसानों के खेतों में खड़े गन्ना, धान और मक्के के रकबे को निगलने वाली राप्ती अब गांवों और घरों की ओर बढ़ रही है। तीनों तहसीलों के 20 से ज्यादा गांव कटान की चपेट में हैं। कई जगह खेत पूरी तरह नदी में समा चुके हैं, तो कहीं पंचायत भवन और स्कूल तक खतरे में हैं।
सदर तहसील के मानकोट टेंगनहिया गांव में नदी अब महज कुछ कदम की दूरी पर बह रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसों से खेती के सहारे जीवन चल रहा था। खेत तो कटान की भेंट चढ़ गए, अब घर भी कगार पर हैं। गांव के करिया, घुरहू, पदुमनाथ, आजम, मुनावर, मोबीन और राज मोहम्मद ने बताया कि नदी का पानी घटते ही किनारों की मिट्टी तेजी से कटने लगी है। एक-एक बीघा खेत पलक झपकते बह रहा है। बेला, किठूरा और कौवा गांव के नाजिम खान, नानबाबू, बेकारू, ननके, कल्लू और श्यामू पासवान के खेत पूरी तरह नदी में विलीन हो गए हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से कटान से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि साल भर की मेहनत और पूंजी नदी में बह गई, अब अगली फसल बोने तक के लिए भी पैसे नहीं बचे।
चौकाकला मधवापुर तो बचा, लेकिन बाकी गांव संकट में
सदर तहसील के चौकाकला मधवापुर गांव को कटानरोधी कार्य से फिलहाल राहत मिल गई है, लेकिन गंगाबक्श भागड़, साहिबनगर, लालपुर फगुइया, कल्यानुपर, जबदहा, जबदही और अन्य गांवों में कटान तेज है। ग्रामीणों के मुताबिक, अगर समय रहते पुख्ता इंतजाम न किए गए तो आने वाले दिनों में कई घर और सार्वजनिक इमारतें नदी में समा सकती हैं। तुलसीपुर तहसील के महरी, मलदा, मिश्रौलिया, साखीरेत और उतरौला तहसील के चिचुड़ी सहंगिया, बारम, नंदौरी, मस्जिदिया, मलमलिया, परसौना, महुआधनी, मटियरिया कर्मा, बायभीट, मझारी बाछिल, मनियरिया, कपौवा, टेढ़वा तप्पाबांक, शेरपुर व अल्ली बुजुर्ग में भी कटान से किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं।
लेखपालों को दिया गया निर्देश
कटान से प्रभावित गांवों में लेखपालों को निगरानी और नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। रिपाेर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -प्रदीप कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व