बलरामपुर। साइलेंट क्लिर पर लगाम लगाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 17 से 29 फरवरी तक जिलेभर में फाइलेरियामुक्त अभियान चलाया जाएगा। जिले के 24,03,428 लोगों को फाइलेरिया की दवा अभियान के दौरान खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान में 1938 टीमें जिलेभर में घर-घर दवा बाटेंगी। अपर सीएमओ डॉ. एके सिंघल ने शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय सभागार में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला को संबोधित कर अभियान के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
अपर सीएमओ ने कहा कि फाइलेरिया लाइलाज बीमारी है। बचाव के लिए दवा खाना जरूरी है। साइलेंट क्लिर कहे जाने वाले फाइलेरिया बीमारी मच्छर का डंक लगने के कई साल बाद उभर कर आती है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। घातक बीमारी फैलाने वाले परजीवी रात में सक्रिय होते हैं। फाइलेरिया के परजीवी की पहचान होने के बाद 12 दिनों तक नियमित दवा खिलाना अनिवार्य है।
फाइलेरिया बीमारी मादा क्यूलेस मच्छर काटने से फैलती है। जिले भर में नाइट ब्लड सर्वे के दौरान अब तक 6 पॉजीटिव केस सामने आए हैं जिनका इलाज शुरू कर दिया गया है। इस अभियान में सभी आशा घर-घर जाकर गर्भवती महिला, बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और दो साल से छोटे बच्चों को छोड़कर सभी को डीईसी व अल्बेंडाजॉल दवा खिलाएंगी। यह दवा खाली पेट नहीं खानी है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. मंजुला आनंद ने अभियान को सफल बनाने की अपील की।
यूनीसेफ की डीएमसी शिखा श्रीवास्तव ने कहा कि 5 से 6 साल तक साल में एक बार दवा खाने पर इस बीमारी के होने की संभावना जड़ से समाप्त हो जाती है। सिर दर्द, शरीर दर्द, बुखार, उल्टी, बदल पर चकट्टे व खुजली जैसी समस्या होने पर व्यक्ति के अंदर माइक्रो फाइलेरिया के लक्षण मौजूद हो सकते हैं जिसे नियंत्रित करने के लिए मौके पर रिस्पांस टीम भेजी जाएगी।