बलरामपुर। विशेष सत्र न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट ने नाबालिग से दुराचार करने का दोषी मानते हुए एक व्यक्ति को 10 वर्ष के कैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने दोषी को 35 हजार रुपये अर्थदंड अदा करने का आदेश दिया है।
विशेष लोक अभियोजक पाॅक्सो एक्ट पवन कुमार वर्मा ने बताया कि थाना ललिया में एक व्यक्ति ने पांच जुलाई 2014 को मुकदमा लिखने का प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप लगाया था कि चार जुलाई 2014 को शौच के लिए गई वादी की बेटी को गांव के सोनू बहला फुसलाकर कहीं भगा ले गया। सोनू भी अपने घर पर मौजूद नहीं है। पुलिस ने मुकदमा लिखकर विवेचना शुरू की। पीड़िता की बरामदगी के बाद उसका डाॅक्टरी परीक्षण कराकर मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराया गया।
पीड़िता के बयान के आधार पर सोनू के खिलाफ दुराचार की धारा की बढ़ोत्तरी करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस मामले में सोनू का सहयोग करने वाले अब्दुल कादिर व सफीउल्ला के खिलाफ भी पुलिस ने नाबालिग को भगाने में सहयोग करने का आरोपी मानते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सत्र परीक्षण के दौरान सात गवाहों में प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट जहेंद्र पाल सिंह ने सोनू को नाबालिग से दुराचार करने का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कारावास व 35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। साक्ष्यों के अभाव में न्यायाधीश ने अब्दुल कादिर व सफीउल्ला को आरोपों से बरी कर दिया है।