UP Politics: बलिया में उस समय मात्र 10 से 12 प्रतिशत ही वोट डालने आए थे। उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला ने बलिया में कोटवा नारायणपुर से लेकर सिताबदीयारा तक गंगा नदी के तटवर्ती गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए कई बांध बनवाए।
बात तब की है जब देश ब्रितानी हुकूमत के अधीन था। उस समय 1926 में सेंट्रल कौंसिल का चुनाव हुआ था। तब बलिया बनारस व गोरखपुर कमिश्नरी के अधीन था। सेंट्रल कौंसिल (लोकसभा) और प्राविन्स कौंसिल (विधानसभा) के चुनाव में ब्रिटिश आईसीएस अफसर एओ ह्यूम की कांग्रेस पार्टी ने सेंट्रल कौंसिल और प्राविंस कौंसिल का चुनाव लड़ा था।
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बलिया क्षेत्र से पंडित मोतीलाल नेहरू ने बाबू भगवान दास के पुत्र श्रीप्रकाश को कांग्रेस प्रत्याशी घोषित किया था। उन्हें ऐसा इसलिए करना पड़ा, क्योंकि कांग्रेस नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू विदेश गए हुए थे। इनके खिलाफ लाला लाजपत राय और पंडित मदनमोहन मालवीय ने हिंदू हितों का नारा देकर उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला को चुनाव मैदान में उतारा था।
इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय बताते हैं कि चुनाव में कांग्रेस के बागी प्रत्याशी घनश्याम दास बिड़ला ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया था। उन्होंने बलिया में कोटवा नारायणपुर से लेकर सिताबदीयारा तक गंगा नदी के तटवर्ती गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए कई बांध बनवाए।
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तालाब और कुएं भी खुदवाए, जो आज भी बिड़ला बांध के रूप में जिले में मौजूद हैं। बेशुमार पैसा खर्च करने वाले बिड़ला चुनाव जीत गए। तब केवल 10 से 12 प्रतिशत लोग ही वोट डालने आए थे।