नवरंगा गांव में आई बाढ़ में डूबा मड़हा व घर में पानी घुसने के बाद छत पर बैठे बाढ़ पीड़ित। संवाद
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बलिया। गंगा की लहरों का उफान शांत होते नहीं दिख रहा है। खतरे के निशान काफी ऊपर चल रही गंगा की लहरें अब उच्चतम बाढ़ बिंदु को छूने को बेताब हैं। उच्चतम बाढ़ बिंदु जनपद के गायघाट गेज पर 60.390 मीटर है। गंगा का जलस्तर शाम चार बजे 60.050 मीटर पहुंच गया था। अभी जलस्तर और तेजी से बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं। यदि नदी इस स्तर को पार कर लेती है बड़ी तबाही मचनी तय है। इसके साथ ही एनएच पर भी दबाव और बढ़ने से कई स्थानों पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
एनएच-31 पर कई जगह रिसाव शुरू हो गया है। इसके चलते सड़क की उत्तर दिशा में बले लोगों में भी भय व्याप्त हो गया है। एनएच-31 के दक्षिण बसे दर्जनों बाढ़ के पानी से घिरे हैं। सीताकुंड मुस्लिम बस्ती के पास गुरुवार को दोबारा रिसाव शुरू हो गया। इतना ही नहीं हल्दी थाने में दो जगहों से पानी रिस कर थाना परिसर को डुबो रहा है। नीरुपुर से रेपुरा जाने वाली सड़क के किनारे केबल बिछाने के कारण सड़क टूटने के कगार पर है। उदय छपरा के लोगों को अपना सामान एनएच-31 पर ले जाने के लिए भी रास्ता नहीं है। बाढ़ पीडि़तों में खलबली मची हैं। सोनार टोला के कटान पीडि़तों का कहना है कि बचाव के नाम पर बाढ़ विभाग अपनी झोली भर रहा है। ठेकेदारों ने नदी में जैसे-तैसें बोल्डर डालकर छोड़ दिया। यह गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से दिखाई भी नहीं दे रहा है। जैसे तैसे मिट्टी भरी बोरी डालकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
बाढ़ का पानी बैरिया और सोहांव में एन-एच 31 को पार करने को आतुर हैं। पानी ने सड़क को छू लिया है। कभी भी गंगा सड़क को पार कर सकती हैं। गुरुवार को नरहीं-कारों मार्ग, नरहीं-महरेंव मार्ग, एनएच-31-बिलरिया, गंगहरा, रैया खाड़ी मार्ग, लक्ष्मणपुर बड़का खेत, कुल्हडि़या मार्ग, बसंतपुर से बेल्सीपार मार्ग पर दो से पांच फिट तक बाढ़ का पानी बह रहा था। कई गांवों का संपर्क टूट गया है। कोट अंजोरपुर, मिल्की, मठिया, इच्छा चौबे का पूरा, शाहपुर बभनौली, बरकंटी, गंगहरा, रैया खाड़ी, बड़का खेत, कुल्हडि़या, सोवन्था नई बस्ती के लोग ऊंचे स्थानों पर शरणार्थी बनकर तिरपाल लगा कर लहरों को देख रहे हैं। किसानों की 90 फीसदी फसलें बर्बाद हो चुकी है। सब्जी की खेती भी नष्ट हो गई है। किसान बूचन राय ने बताया कि ढ़ाई बीघा हरी मिर्च, मक्के व धान की खेती बर्बाद हो गई है। चार लाख से अधिक का नु़कसान हुआ है। शौचालय नहीं होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।